VALMIKI jAYANTI 2025 : महर्षि बाल्मीकि

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October 5, 2025

 Valmiki Jayanti 2025

  Valmiki Jayanti 2025 मै कब है? Valmiki Jayanti का महत्त्व क्या है? हर वर्ष आश्विन मास की पूर्णिमा को बाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। इसे ‘प्रगट दिवस’ भी कहा जाता है।

महर्षि बाल्मीकि जी का जीवन

Valmiki Jayanti 2025 महर्षि बाल्मीकि जी का जन्म हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास को हुआ था ! हर वर्ष इस दिन को बाल्मीकि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में Valmiki Jayanti 7 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।

  • बाल्मीकि  जी का बाल्यकालिक नाम रत्नाकर था। वो एक साधारण परिवार में जन्मे थे। जीवन की कठिनाईयों से ना लड़ पाने के कारण उन्होंने अपना जीवन गलत मार्ग पर लगा दिया था।
  • .बाल्मीकि जी जीवन में आने वाली अनेकों कठिनाईयों के कारण डाकू बन गए थे। एक दिन जब उन्होंने नराद मुनि को लूटने का प्रयत्न किया। तब नराद जी ने बाल्मीकि जी से एक प्रश्न किया। क्या तुम्हारा परिवार तुम्हारे पाप का भागीदार बनेगा। इस सवाल का जवाब वाल्मिकी जी के पास नहीं था।
  • नारद मुनि ने कहा, आप एक बार अपने परिवार से पूछ कर आइए कि, आपके पापो का भागीदार आपके साथ कौन कौन होगा।
  • तब वाल्मीकि जी अपने परिवार के पास जाकर हर एक सदस्य से ये सवाल पूछा कि, जो पाप मै करता हु, इसका भागीदार आप लोगों में, मेरे साथ कौन-कौन होगा।
  • वाल्मीकि जी के परिवार ने पाप का भागीदार होने से साफ साफ मना कर दिया।
  • इसके बाद वाल्मीकि जी नारद मुनि के पास वापस आए और बोले हे, मुनिवर कृपया मुझे रास्ता दिखाए।
  • इसके बाद वाल्मीकि जी ने वैराग्य धारण कर लिया।

बाल्मीकि जी को उनका ये नाम कैसे मिला

नराद मुनि के मार्ग दर्शक के बाद वे राम-राम नाम का जाप करना शुरू कर दिया । वो राम-राम नाम मै इतने गहन ध्यान में लीन हो गाए कि उनके चारों तरफ दीमको ने मिट्टी का ढेर बना दिया था। जिसे वाल्मीक कहते है । कई वर्ष बाद जब वे ध्यान से उठें। तो उन्हें ब्रह्मा जी रत्नाकर की तपस्या से प्रसन्न होकर उनका नाम बाल्मीकि नाम दिया गया।

महर्षि वाल्मीकि और रामायण की रचना

महर्षि बाल्मीकि जी ने रामायण की रचना, त्रेतायुग में श्री राम जी के राज्याभिषेक के बाद की थी। पारंपरिक मान्यताओं और कई शास्त्रों के अनुसार बाल्मीकि जी को रामायण लिखने की प्रेरणा ब्रह्मा जी और नारद मुनि द्वारा प्राप्त हुई थी।

बाल्मीकि जी को आदि कवि भी कहा जाता था। क्योंकि उन्होने संस्कृत में पहली महाकथा रामायण लिखा।और जब रामायण की रचाना की। उस के बाद वे समाज के लिए आदर्श बन गए। बाल्मीकि जी के आश्रम में ही माँ सीता ने आश्रय लिया। और वहीं लव-कुश जन्म हुआ और पालन पोषण हुआ। बाल्मीकि जी ने वही लव-कुश को रामायण की कथा सुनाई।

बाल्मीकि जी की प्रमुख शिक्षाएं

  1. अच्छे कर्म : जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए। क्योंकि अच्छे कर्म का फल मिलता है ।अच्छे कर्म करने से मनुष्य का जीवन अच्छा बनता है।
  2.   शिक्षा और ज्ञान का महत्त्व : शिक्षा और ज्ञान के बिना जीवन अधूरा है।
  3. मर्यादा और अनुशासन : बाल्मीकि जी की रचना रामायण में, मर्यादा पुरूषोतम राम से प्रेरित होकर, अनुशासन और समाज में शांति आ सकती है।
  4. समानता और मानवता का संदेश :  बाल्मीकि जी सभी मनुष्यों को समान मानते थे।
  5. समाज के प्रति कर्तव्य : धर्म और नैतिकता सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी जरूरी है

VALMIKI JAYANTI 2025 मनाने का संदेश

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर यह संदेश दिया जाता है। कि, महर्षि बाल्मीकि जी के जीवन से प्रेरणा लेकर सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलना । महर्षि बाल्मीकि जी ने रामायण की रचना करके, जीवन का आदर्श स्थापित किया, जो आज भी मानवता की शिक्षा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं, जो हमें जीवन में सत्य और धर्म के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

निष्कर्ष (CONCLUSION)

महर्षि बाल्मीकि जयंती न केवल एक त्यौहार है। बल्कि जीवन में अच्छा बनने, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने कि प्रेरणा भी देता है। यह त्यौहार हमारे जीवन को धार्मिक और अत्याध्मिक मूल्यों से भी जोड़ता है और जीवन को सकारात्मक रूप से जीने की प्रेरणा देता है।

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