
Premanand Ji Maharaj : जानिए प्रेमानंद जी महाराज कौन हैं, उनकी संत बनने की कहानी, राधा-कृष्ण की भक्ति, प्रसिद्धि और स्वास्थ्य की सच्चाई। उनके जीवन से सीखें भक्ति और सेवा की असली महत्ता।
Premanand Ji Maharaj कौन हैं?
प्रेमानंद जी महाराज का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में सन 1969 में हुआ था। वे एक धार्मिक ब्राह्मण परिवार से आते हैं। उन्होंने बहुत कम उम्र में (13 साल ) सांसारिक मोह त्याग कर साधना और तपस्या का रास्ता अपनाया। प्रेमानंद जी महाराज ने वाराणसी के गंगा तट पर तपस्या की, जहां वे गंगाजल पीकर और ध्यान में कई दिन बिताते थे। उसके बाद वे वृंदावन आकर श्री हित गौरांगी शरण से दीक्षा ली और वे संत बन गए। उनका आश्रम वृंदावन में “श्री हित राधा केली कुंज” भक्तों के लिए अध्यात्मिक केंद्र है। ये भी पढ़ें..
Premanand Ji Maharaj की संत बनने की कहानी :
प्रेमानंद जी महाराज ने 13 साल की छोटी सी आयु में सांसारिक जीवन के मोह को त्याग दिया। वाराणसी उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ वे भिक्षा मांगकर, गंगा किनारे ध्यान और तपस्या करते थे, और वहीं तुलसी घाट पर शिव जी की पूजा करते थे, वहां उन्होंने अपने गुरु से दीक्षा ली और आध्यात्मिक जीवन आरंभ किया। वे कठोर साधना करते,और गंगा व महादेव का ध्यान करते थे। कई दिन वे केवल गंगाजल पीकर ही व्यतीत करते थे। उनकी यह तपस्या और भक्ति देखकर संतों ने भविष्यवाणी की कि वे करोड़ों भक्तों के लिए मार्गदर्शन का मार्ग बनेंगे,वाराणसी की कठिन तपस्या के बाद वे वृंदावन पहुंचे।
Premanand Ji Maharaj क्यों प्रसिद्ध हैं?
जब राधा रानी के भक्तों की बात होती है उनमें सबसे पहले
प्रेमानंद जी महाराज का नाम आता है। वे भक्ति योग और भगवान कृष्ण तथा राधा रानी के प्रति अपनी गहरी भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। वे सभी भक्तों को भक्ति, सेवा, और त्याग की शिक्षाएं देते हैं। उनकी साधना और कठोर तपस्या के कारण उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली। लोग उनके सत्संग सुनने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए वृंदावन आते हैं। उनके भक्तों में साधारण जनता के साथ-साथ फिल्मी सितारे और क्रिकेटर भी शामिल हैं। उनके भजन, प्रवचन और जीवन शैली लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं, उनके प्रवचन से अनेकों लोगों का जीवन सही मार्ग पर आ चुका है। प्रेमानंद जी महाराज भगवान को लोग भगवान की तरह ही पूजते है और उनके दर्शन के लिए सुबह 2:30 बजे पहुंच जाते है जब महाराज जी परिक्रमा के निकलते है।
Premanand Ji Maharaj की तबियत और स्वास्थ्य स्थिति :
प्रेमानंद जी महाराज की तबियत किडनी की गंभीर बीमारी की वजह से कुछ गम्भीर है। वे पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) नामक जेनेटिक बीमारी से बहुत लंबे समय से बीमार हैं, जिसमें उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। वे इस समय पर पूरे दिन डायलिसिस पर हैं। कुछ हफ्तों से उनकी सेहत में कुछ गिरावट देखी गई है, हालाँकि आश्रम ने कहा है कि वे स्थिर हैं और अपनी दिनचर्या जारी रख रहे हैं, पर उनकी सुबह की पैदल यात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है।
प्रेमानंद जी महाराज ने स्वयं कहा है, “दोनों किडनी फेल हैं, अब ठीक होने को कुछ बचा नहीं है, अब तो जाना है।” भक्तों ने कई बार उन्हें किडनी दान करने की पेशकश की, लेकिन महाराज ने किडनी लेने से मना कर दिया है, वे चाहते है कि किसी को दुःख न पहुंचे ,वे सोशल मीडिया और वीडियो में अभी भी मुस्कुराते हुए और प्रसन्नचित्त दिखाई देते हैं, जिससे भक्तों को कुछ राहत मिली है। उनके स्वास्थ्य के बारे में अफवाहें फैलाने से आश्रम ने सावधानी बरतने का आग्रह भी किया है।
Premanand Ji Maharaj के जीवन से मिलने वाला अमृत :
Premanand Ji Maharaj : के जीवन का अमृत भक्ति, सेवा, और मोक्ष की ओर मार्गदर्शन है, जो उनके प्रवचनों और संदेशों में गहराई से झलकता है। उनका कहना है कि जीवन का सच्चा उद्देश्य सांसारिक मोह-माया और कर्मों के बंधनों से मुक्त होना है, और इसके लिए भक्ति का मार्ग एकमात्र रास्ता है।
Premanand Ji Maharaj : की शिक्षा में भक्ति का अर्थ है भगवान के प्रति समर्पण, प्रेम, और उनके नाम का जाप। वे कहते हैं कि बिना भगवान के प्रेम के, सांसारिक जीवन जड़ता और दुख से भरा रहता है। भक्ति में मन, वाणी और कर्म से पूर्ण लगन होनी चाहिए। यह भक्ति मनुष्य को मोह-माया से दूर कर, उसे परमात्मा के पास ले आती है, जिससे जीवन पवित्र, सुखी और शांतिपूर्ण होता है। वे इससे मोक्ष अर्थात् जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का ek मात्र रास्ता बताते हैं। जब तक मनुष्य कर्मों के फल भुगतता रहेगा, जन्म-मरण का चक्र चलता रहेगा, पर भक्ति से उसके कर्म नष्ट हो जाते हैं, जिससे मोक्ष प्राप्ति संभव होती है।