
India’s Real-time Tsunami Alert System Tarang : जानिए भारत के नई तकनीक आधारित (Tarang)रियल-टाइम सुनामी अलर्ट सिस्टम के फीचर्स, फायदे और..
उसका समुद्री आपदा सुरक्षा में योगदान। कैसे अब भारतीय समुद्री तटों पर चेतावनी देने में लगने वाला समय होगा मात्र 2 मिनट। ये भी पढ़ें..Suzlon Energy Share 2025: निवेश के लिए बेहतरीन विकल्प
क्या है? Tarang और क्यों है खास : India’s Real-time Tsunami Alert System Tarang
- Tarang एक अत्याधुनिक हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग (HPC) सिस्टम है जिसे
- INCOIS (Indian National Centre for Ocean Information Services) ने ISRO की मदद से विकसित किया है।
- यह सिस्टम मल्टी-टास्किंग, मल्टी-प्रोग्राम और मल्टी-यूज़र वातावरण पर आधारित है
- 99.5% अपटाइम और हाई-लेवल प्रोसेसिंग क्षमताओं से लैस है
1 Peta FLOPS कंप्यूटिंग पॉवर,
2 Peta Byte स्टोरेज, और
3 Peta Byte आर्काइवल स्टोरेज क्षमता रखता है, साथ ही इसमें 15.5 Peta FLOPS की अलग से AI और मशीन लर्निंग (ML) क्षमताएँ हैं, जो इसे अत्याधुनिक बनाती हैं।
कैसे करता है काम? : India’s Real-time Tsunami Alert System Tarang
Tarang का मुख्य उद्देश्य समुद्री भूकंप या अन्य घटनाओं के बाद रियल-टाइम में डेटा एकत्र कर स्वचालित सुनामी चेतावनी (Automated Tsunami Alert) जारी करना है।
India’s Real-time Tsunami Alert System Tarang : की प्रक्रिया
- समुद्र में जब 6.5 या उससे अधिक तीव्रता और 10 किमी से कम गहराई का भूकंप होता है, तो सेंसर और सेसमोमीटर तुरंत डेटा INCOIS तक भेजते हैं।
- Tarang उस डेटा को AI मॉडल्स के जरिए विश्लेषित करता है।
- 2 मिनट के भीतर पहला ऑटोमेटेड अलर्ट तैयार हो जाता है।
- 5 मिनट में प्रशासन और जनता को पहला बुलेटिन जारी किया जाता है।
- इस पूरी प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग किया जाता है ताकि अलर्ट अधिक सटीक और तेज़ हों।
पुराने सिस्टम की तुलना में Tarang कितना बेहतर है?

India’s Real-time Tsunami Alert System Tarang : पहले भारत में सुनामी चेतावनी देने में 10–20 मिनट तक का समय लगता था।
अब Tarang इस प्रक्रिया को घटाकर 2 मिनट से भी कम कर देगा।
Tarang से होने वाले प्रमुख लाभ
- तटीय इलाकों के लोग समय पर सुरक्षित स्थान तक पहुंच सकेंगे।
- पदा प्रबंधन और राहत कार्यों की गति बढ़ेगी।
- स्कूल, अस्पताल, बंदरगाह और औद्योगिक क्षेत्र अधिक सुरक्षित रहेंगे।
Tarang की तकनीकी विशेषताएँ (Technical Features)
विशेषता विवरण : India’s Real-time Tsunami Alert System Tarang
- सिस्टम आर्किटेक्चर 64-बिट मल्टी-यूज़र, मल्टी-टास्किंग प्लेटफॉर्म
- कंप्यूटिंग क्षमता 1 Peta FLOPS (AI + ML मॉडल्स सहित 15.5 Peta FLOPS)
- डेटा स्टोरेज 2 PB स्टोरेज + 3 PB आर्काइवल स्टोरेज
- विशेषताएँ AI/ML आधारित Tsunami Forecast Model
- अनुप्रयोग Ocean Currents, High Waves, Extreme Currents और Storm Surge Detection
- सहयोग INCOIS, ISRO, NIOT, IMD, NDMA
- Tarang न केवल सुनामी बल्कि भविष्य में समुद्री तूफान, ऊँची लहरें, और मौसमीय आपदाओं की भविष्यवाणी में भी मदद करेगा।
2004 की सुनामी से मिला सबक

India’s Real-time Tsunami Alert System Tarang : 26 दिसंबर 2004 की भयावह इंडियन ओशन सुनामी ने चेतावनी प्रणाली की कमी उजागर कर दी थी।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने वैज्ञानिक संस्थानों जैसे ISRO, IMD, NIOT, INCOIS आदि के साथ मिलकर
एक सशक्त Tsunami Warning System बनाया — और ‘Tarang’ उसी यात्रा का नवीनतम अध्याय है।
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और NDMA की भूमिका
- Tarang के साथ-साथ सरकार ने कई और प्रयास किए हैं:
- तटीय क्षेत्रों में जागरूकता और Preparedness ड्रिल्स
- High-tech Tsunami Buoys और Bottom Pressure Recorders (BPRs) की स्थापना
- NDMA द्वारा आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और रिस्क कम्युनिकेशन नेटवर्क्स का विस्तार
Tarang से आम लोगों को क्या लाभ होगा?
- ग्रामीण और शहरी तटीय इलाकों में मोबाइल अलर्ट्स और मीडिया चेतावनियाँ
- मछुआरों और व्यापारियों को समय पर सूचना
- स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में ट्रेनिंग व जागरूकता कार्यक्रम
- पूरे तटीय इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और त्वरित निकासी की सुविधा
निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
(Tarang) भारत की आपदा प्रबंधन क्षमता में एक ऐतिहासिक छलांग है।
इससे भारत न केवल अपने समुद्री तटों बल्कि इंडियन ओशन रीजन के 25 देशों को भी समय रहते चेतावनी भेज सकेगा।
तेज़, सटीक और ऑटोमेटेड डेटा प्रोसेसिंग के माध्यम से भारत अब ग्लोबल Tsunami Early Warning Leader बनने की दिशा में अग्रसर है।
इससे भारत का आपदा चेतावनी तंत्र और अधिक तेज़ विश्वसनीय और तकनीकी रूप से उन्नत बनेगा।