Pankaj Dheer (Rip) : पंकज धीर का निधन

Pankaj Dheer


Pankaj Dheer: जानिये पंकज धीर की जिंदगी की प्रेरक कहानी-कैसे उन्होंने महाभारत के कर्ण से अपनी पहचान बनाई और फिर फिल्मों व निर्देशन की दुनिया में सफलता प्राप्त की।

Pankaj Dheer का परिचय :

पंकज धीर भारतीय फिल्म और टेलीविज़न जगत के एक जाने-माने अभिनेता, निर्देशक और लेखक हैं। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1980 के दशक में की थी और आज भी दर्शकों के बीच अपनी गहरी छाप छोड़ चुके हैं। टीवी के लोकप्रिय शो “महाभारत” में कर्ण का किरदार निभाकर वे देशभर में घर-घर प्रसिद्ध हो गए। उनके “महाभारत” में कर्ण का किरदार लोगों की दिलों में वस चुका है। ये भी पढ़ें…

Pankaj Dheer प्रारंभिक जीवन :

पंकज धीर का जन्म 9 नवंबर 1959 को हुआ था। उनके पिता सी. एल. धीर एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक थे, जिससे उन्हें बचपन से ही फिल्मी माहौल का अनुभव मिला। पंकज धीर ने पढ़ाई के बाद अभिनय को अपना करियर बनाने का फैसला किया और फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आ गए।

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Pankaj Dheer के करियर की शुरुआत :

पंकज धीर ने अपने करियर की शुरुआत सनी देओल की फ़िल्म “सोहनी महिवाल” (1984) से की। लेकिन उन्हें असली पहचान मिली बी. आर. चोपड़ा के महाकाव्य धारावाहिक “महाभारत” से, जो उस समय सबसे प्रसिद्ध धारावाहिक था, जिसमें उन्होंने कर्ण का किरदार निभाया।
उनकी दमदार आवाज़, संवाद अदायगी, और भावनात्मक अभिनय ने उन्हें उस दौर का सबसे लोकप्रिय टीवी चेहरा बना दिया।

“महाभारत” में कर्ण का किरदार : अमर पहचान

महाभारत में कर्ण का किरदार निभाना पंकज धीर के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने इस किरदार को ऐसी गहराई से निभाया कि दर्शक आज भी उन्हें ‘कर्ण’ के नाम से पहचानते हैं। उन्होंने इस किरदार को अमर कर दिया है, इस धारावाहिक ने सिर्फ उन्हें प्रसिद्धि दिलाई, और अभिनय जगत की दुनिया में उनकी अनोखी पहचान भी स्थापित की।

फिल्मों में योगदान

टीवी के साथ-साथ पंकज धीर ने कई हिंदी फिल्मों में काम किया, जिनमें शामिल हैं:

  • “Tahalka” (1992)
  • “Soldier” (1998)
  • “Inteqam” (2001)
  • “Refugee” (2000)
  • “Barsaat” (1995)
  • ” Sanam Bewafa”(1991)
  • “Saugandh” (1991)

उनका किरदार अक्सर एक मजबूत, ईमानदार या खलनायक की छवि में होता था, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।

Pankaj Dheer ki टीवी इंडस्ट्री में सफल पहचान

पंकज धीर ने “कयामत”, “चंद्रकांता”, “युग”, “कबूल है” और “ससुराल सिमर का” जैसे कई लोकप्रिय टीवी धारावाहिक में बतौर अभिनेता काम किया।
उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और डायलॉग डिलीवरी उन्हें अन्य अभिनेताओं से अलग बनाती है। वे और भी विभिन्न टीवी प्रोजेक्ट्स में नजर आते रहते थे

Pankaj Dheer का निर्देशक और लेखक के रूप में सफर

पंकज धीर ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन में भी हाथ आजमाया। 2014 में उन्होंने “My Father Godfather” नाम से एक फिल्म का निर्देशन किया, इस फिल्म कई टीवी और फिल्म जगत के कई जाने-माने कलाकारों ने काम उनकी फिल्म काम किया।
वे कई शॉर्ट फिल्मों और विज्ञापनों में भी निर्देशन कर चुके हैं, जिससे उन्होंने अपने बहुमुखी टैलेंट का परिचय दिया।

Pankaj Dheer का परिवार

पंकज धीर का परिवार भी फिल्म जगत से जुड़ा है। उनके पुत्र निकितिन धीर एक प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता हैं जिन्होंने “चेनाई एक्सप्रेस” और “डब्बा रैय्या” जैसी फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया।
उनकी पत्नी अनु धीर एक सफल व्यवसायी हैं, जो अपने पति और बेटे दोनों के करियर को संभालने में एक अहम भूमिका निभाती हैं।

पुरस्कार और सम्मान

  • लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (टीवी इंडस्ट्री)
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: “महाभारत” 1988 (डीडी नेशनल सीरीज़)
    *स्टार गिल्ड ऑनर: इंडस्ट्री में लंबे समय तक योगदान के लिए सम्मानित

Pankaj Dheer ने कहा दुनिया को अलविदा (1959-2025)

पंकज धीर का देहांत 15 अक्टूबर 2025 को हुआ। वे 68 वर्ष के थे। बताया गया है कि वे लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और इलाज के बाद भी उनकी हालत गंभीर बनी रही, जिस कारण उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मुंबई में किया गया। यह खबर फैन्स और इंडस्ट्री में काफी शोक लेकर आई है ।

निष्कर्ष (Conclusion)

पंकज धीर की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं है, यह कहानी है उनके संघर्ष, समर्पण और प्रतिभा की , जो एक मिसाल है।
टीवी के ‘कर्ण’ से लेकर निर्देशक और मार्गदर्शक बनने तक उनकी यात्रा दर्शाती है कि मेहनत और निरंतरता से हर लक्ष्य संभव है।
वे भारतीय टेलीविजन के इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में से एक हैं, जिनका योगदान प्रेरणा बन चुका है।
वो हमेशा एक अभिनेता के तौर पर हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे।

Premanand Ji Maharaj : का आध्यात्मिक जीवन

Premanand Ji Maharaj
Premanand Ji Maharaj


Premanand Ji Maharaj : जानिए प्रेमानंद जी महाराज कौन हैं, उनकी संत बनने की कहानी, राधा-कृष्ण की भक्ति, प्रसिद्धि और स्वास्थ्य की सच्चाई। उनके जीवन से सीखें भक्ति और सेवा की असली महत्ता।

Premanand Ji Maharaj कौन हैं?

प्रेमानंद जी महाराज का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में सन 1969 में हुआ था। वे एक धार्मिक ब्राह्मण परिवार से आते हैं। उन्होंने बहुत कम उम्र में (13 साल ) सांसारिक मोह त्याग कर साधना और तपस्या का रास्ता अपनाया। प्रेमानंद जी महाराज ने वाराणसी के गंगा तट पर तपस्या की, जहां वे गंगाजल पीकर और ध्यान में कई दिन बिताते थे। उसके बाद वे वृंदावन आकर श्री हित गौरांगी शरण से दीक्षा ली और वे संत बन गए। उनका आश्रम वृंदावन में “श्री हित राधा केली कुंज” भक्तों के लिए अध्यात्मिक केंद्र है। ये भी पढ़ें..

Premanand Ji Maharaj की संत बनने की कहानी :

प्रेमानंद जी महाराज ने 13 साल की छोटी सी आयु में सांसारिक जीवन के मोह को त्याग दिया। वाराणसी उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ वे भिक्षा मांगकर, गंगा किनारे ध्यान और तपस्या करते थे, और वहीं तुलसी घाट पर शिव जी की पूजा करते थे, वहां उन्होंने अपने गुरु से दीक्षा ली और आध्यात्मिक जीवन आरंभ किया। वे कठोर साधना करते,और गंगा व महादेव का ध्यान करते थे। कई दिन वे केवल गंगाजल पीकर ही व्यतीत करते थे। उनकी यह तपस्या और भक्ति देखकर संतों ने भविष्यवाणी की कि वे करोड़ों भक्तों के लिए मार्गदर्शन का मार्ग बनेंगे,वाराणसी की कठिन तपस्या के बाद वे वृंदावन पहुंचे।

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Premanand Ji Maharaj क्यों प्रसिद्ध हैं?

जब राधा रानी के भक्तों की बात होती है उनमें सबसे पहले
प्रेमानंद जी महाराज का नाम आता है। वे भक्ति योग और भगवान कृष्ण तथा राधा रानी के प्रति अपनी गहरी भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। वे सभी भक्तों को भक्ति, सेवा, और त्याग की शिक्षाएं देते हैं। उनकी साधना और कठोर तपस्या के कारण उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली। लोग उनके सत्संग सुनने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए वृंदावन आते हैं। उनके भक्तों में साधारण जनता के साथ-साथ फिल्मी सितारे और क्रिकेटर भी शामिल हैं। उनके भजन, प्रवचन और जीवन शैली लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं, उनके प्रवचन से अनेकों लोगों का जीवन सही मार्ग पर आ चुका है। प्रेमानंद जी महाराज भगवान को लोग भगवान की तरह ही पूजते है और उनके दर्शन के लिए सुबह 2:30 बजे पहुंच जाते है जब महाराज जी परिक्रमा के निकलते है।

Premanand Ji Maharaj की तबियत और स्वास्थ्य स्थिति :

प्रेमानंद जी महाराज की तबियत किडनी की गंभीर बीमारी की वजह से कुछ गम्भीर है। वे पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) नामक जेनेटिक बीमारी से बहुत लंबे समय से बीमार हैं, जिसमें उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। वे इस समय पर पूरे दिन डायलिसिस पर हैं। कुछ हफ्तों से उनकी सेहत में कुछ गिरावट देखी गई है, हालाँकि आश्रम ने कहा है कि वे स्थिर हैं और अपनी दिनचर्या जारी रख रहे हैं, पर उनकी सुबह की पैदल यात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है।
प्रेमानंद जी महाराज ने स्वयं कहा है, “दोनों किडनी फेल हैं, अब ठीक होने को कुछ बचा नहीं है, अब तो जाना है।” भक्तों ने कई बार उन्हें किडनी दान करने की पेशकश की, लेकिन महाराज ने किडनी लेने से मना कर दिया है, वे चाहते है कि किसी को दुःख न पहुंचे ,वे सोशल मीडिया और वीडियो में अभी भी मुस्कुराते हुए और प्रसन्नचित्त दिखाई देते हैं, जिससे भक्तों को कुछ राहत मिली है। उनके स्वास्थ्य के बारे में अफवाहें फैलाने से आश्रम ने सावधानी बरतने का आग्रह भी किया है।

Premanand Ji Maharaj के जीवन से मिलने वाला अमृत :


Premanand Ji Maharaj : के जीवन का अमृत भक्ति, सेवा, और मोक्ष की ओर मार्गदर्शन है, जो उनके प्रवचनों और संदेशों में गहराई से झलकता है। उनका कहना है कि जीवन का सच्चा उद्देश्य सांसारिक मोह-माया और कर्मों के बंधनों से मुक्त होना है, और इसके लिए भक्ति का मार्ग एकमात्र रास्ता है।
Premanand Ji Maharaj : की शिक्षा में भक्ति का अर्थ है भगवान के प्रति समर्पण, प्रेम, और उनके नाम का जाप। वे कहते हैं कि बिना भगवान के प्रेम के, सांसारिक जीवन जड़ता और दुख से भरा रहता है। भक्ति में मन, वाणी और कर्म से पूर्ण लगन होनी चाहिए। यह भक्ति मनुष्य को मोह-माया से दूर कर, उसे परमात्मा के पास ले आती है, जिससे जीवन पवित्र, सुखी और शांतिपूर्ण होता है। वे इससे मोक्ष अर्थात् जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का ek मात्र रास्ता बताते हैं। जब तक मनुष्य कर्मों के फल भुगतता रहेगा, जन्म-मरण का चक्र चलता रहेगा, पर भक्ति से उसके कर्म नष्ट हो जाते हैं, जिससे मोक्ष प्राप्ति संभव होती है।

Diwali 2025 India : 20 Oct या 21 oct

Diwali 2025 India

Diwali 2025 India : रोशनी, खुशियों और समृद्धि का महापर्व – जानिए दीपावली का महत्व, कहानी और पूजा विधि, ये भी जानिए कब मनाएं 20 अक्टूबर या 21 अक्टूबर।

Diwali 2025 India : का पर्व भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। जानिए दिवाली का महत्व, इतिहास, पूजन विधि, कथा और त्योहार की 5 दिन की विशेषताएँ। मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं। ये भी देखे…

Diwali 2025 India : दीपावली का महत्व और शुरुआत :

Diwali 2025 India : दीपावली या दीवाली भारत का सबसे बड़ा और प्रमुख त्यौहार है। इसे “रोशनी का त्योहार” कहा जाता है क्योंकि इस दिन अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म के साथ-साथ जैन, सिख और कुछ बौद्ध समुदाय भी इस पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।
इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और बुद्धि के देवता भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है ताकि घर में सुख-समृद्धि और वैभव का आगमन हो सके।

Diwali 2025 India : दीपावली के पीछे की कथाएँ :

दीवाली का संबंध अनेक ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है।

  • रामायण के अनुसार: जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर राक्षस रावण का वध करके अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। अयोध्या दीपों से जगमगा उठी और तभी से इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
  • भगवान कृष्ण और नरकासुर की कथा: कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्त कराया था। इस जीत की खुशी में लोगों ने दीप जलाएं।
  • मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कथा: यह भी माना जाता है कि दीपावली के दिन मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपना पति रूप में स्वीकार किया था, इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।

Diwali 2025 India : दीपावली उत्सव की खासियतें


दीवाली 5 दिनों तक चलने वाला महापर्व है, जो धन और खुशियों का प्रतीक है –

1-धनतेरस – इस दिन धन और आरोग्य की कामना की जाती है।
2-नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली) – नरकासुर के वध की कथा का स्मरण।
3-मुख्य दीपावली – लक्ष्मी पूजन का दिन, जब घरों में दीप जलाए जाते हैं।
4-गोवर्धन पूजा – भगवान कृष्ण की आराधना और गोवर्धन पर्वत की पूजा।
5-भाई दूज – भाई-बहन के प्रेम का पर्व।

Diwali 2025 India : इन पांच दिनों में लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली, लाइट्स और फूलों से सजाते हैं। स्वादिष्ट पकवान, मिठाइयाँ और नमकीन बनाए जाते हैं। हर जगह उत्साह, खुशी और अपार ऊर्जा का वातावरण होता है। रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच उपहारों का आदान-प्रदान होता है, जिससे रिश्तों में नयापन आता है। यही समय व्यापारियों के लिए भी सबसे लाभकारी होता है क्योंकि लोग नए कपड़े, गहने, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपहार खरीदते हैं।

Diwali 2025 India : दीपावली पूजन सामग्री :


दीपावली पूजा के लिए निम्न सामग्री आवश्यक होती है:
चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत, सुपारी, नारियल, देशी घी, दीपक, गंगाजल, शहद, चीनी, दही, दूध, फल-फूल, मिठाइयाँ, आम के पत्ते, कपूर, आरती की थाल, खील, बताशे, धूप, सिक्के।

Diwali 2025 India : दीपावली पूजा विधि

  • 1- पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएँ।
  • 2- चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। गणेश जी को दाहिनी ओर रखें।
  • 3- भगवान कुबेर, मां सरस्वती और कलश की स्थापना करें।
  • 4- गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।
  • 5- हाथ में पुष्प लेकर गणेश जी का ध्यान करें और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • 6- सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, उन्हें दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
  • 7- मां लक्ष्मी को सिंदूर का तिलक लगाएँ और श्रीसूक्त मंत्र का जाप करते हुए पूजन करें।
  • 8- भगवान कुबेर और मां सरस्वती की पूजा करें।
  • 9- सभी देवताओं की आरती करें और भोग लगाएँ।
  • 10- परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
  • 11- अंत में दीप जलाकर मां लक्ष्मी और गणेश जी के सामने दीपमाल जलाएँ।

Diwali 2025 India : निष्कर्ष

दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन में अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने, नकारात्मकता से सकारात्मकता अपनाने और भाईचारे, प्रेम व समृद्धि के मूल्यों को जगाने का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर दीपक की रोशनी हर घर में खुशियों की किरणें लाती है।

Diwali 2025 India : FAQs

Q1. दीपावली 2025 में कब है?
दीपावली 2025 का मुख्य पर्व 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। यह तिथि कार्तिक अमावस्या के दिन होती है।

Q2. दीपावली का धार्मिक महत्व क्या है?
दीपावली अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है ताकि घर में सुख, शांति और समृद्धि आए।

Q3. दीपावली क्यों मनाई जाती है?
रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाए गए थे। इसी परंपरा को आज भी दीपों के पर्व के रूप में मनाया जाता है।

Q4. दीपावली के कितने दिन होते हैं और उनके नाम क्या हैं?
दीपावली पांच दिनों तक मनाई जाती है – धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), मुख्य दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।

Q5. दीपावली की पूजा कैसे की जाती है?
लाल या पीले कपड़े पर मां लक्ष्मी, गणेश जी, भगवान कुबेर और मां सरस्वती की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं। गंगाजल, दीपक, मिठाई और फूलों से पूजा की जाती है, फिर आरती उतारकर दीप जलाए जाते हैं।

Q6. दीपावली पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस और दीपावली पर सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है। यह धन और समृद्धि का प्रतीक है।

Q7. दीपावली पर्व के दौरान कौन-कौन से व्यंजन बनाए जाते हैं?
इस त्योहार पर मिठाइयों जैसे गुलाब जामुन, लड्डू, गुजिया, नमकीन और चिप्स, मठरी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।

Q8. दीपावली केवल हिन्दुओं द्वारा ही मनाई जाती है?
नहीं, दीपावली जैन, सिख और कुछ बौद्ध समुदायों द्वारा भी मनाई जाती है, हालांकि उनकी अपनी धार्मिक मान्यताएं होती हैं।

Q9. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का समय कब होता है?
दीपावली पूजन प्रदोष काल या निशीथ काल में करना सबसे शुभ माना गया है, जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है।

Q10. दीपावली का मुख्य संदेश क्या है?
दीपावली का मुख्य संदेश है – “अंधकार से प्रकाश की ओर, बुराई से अच्छाई की ओर, और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ना।”

Tesla Phone in India : 2025 चर्चा में

Tesla Phone In India
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Tesla Phone in india : एक परिचय

Tesla Phone in india ; एलन मस्क की कंपनी टेस्ला अपने इलेक्ट्रिक वाहनों और टेक्नोलॉजी के लिए विश्वविख्यात है। और अब टेस्ला फोन के बारे में चर्चा हो रही है, जिसे “Tesla Pi Phone” के नाम से जाना जा रहा है। यह फोन 2025 में लॉन्च होने की उम्मीद है और इसे लेकर बाजार में काफी उत्सुकता और अफवाहें बनी हुई हैं। टेस्ला का यह फोन केवल एक स्मार्टफोन नहीं बल्कि तकनीक और लाइफस्टाइल को जोड़ने वाला एक फ्यूचरिस्टिक डिवाइस होगा।

वैसे तो india में iPhone का बोल बाला है। जिसके पास iphone होता है। वो अपने आप को Premium Feel करता है। क्योंकि iphone अपने प्रीमियम लुक और सिक्योरिटी फीचर को लेकर काफी अलर्ट रहता है। ऐसे में क्या Tesla Phone indian मार्केट में अपनी धाक जमा पाएगा? या और सभी एंड्रॉयड स्मार्ट फोन की तरह नॉर्मली चलता रहेगा। या इंडियन मार्केट में बिल्कुल ही टिक नहीं पाएगा। बहुत सारे सवाल आपके मन में भी आ रहे होंगे। लेकिन किसी भी स्मार्टफोन फोन को उसकी विशेषता ही आगे या पीछे ले जाती है। आइए टेस्ला फोन की कुछ विशेषताओं पर नजर डालते है।

Tesla Pi Phone की प्रमुख विशेषताएं :

Tesla Phone in india : टेस्ला फोन को लेकर जो अनुमान और अफवाहें प्रचलित हैं, उनके अनुसार इस फोन में निम्नलिखित उन्नत फीचर्स हो सकते हैं। Specification देखे..

  • 6.7 इंच की सुपर AMOLED डिस्प्ले, जो बेहतर विजुअल अनुभव देता है।
  • हाई-पावर Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर या टेस्ला की अपनी Gen3 चिपसेट।
  • ट्रिपल 50 मेगापिक्सल कैमरा सेटअप, सबसे उन्नत तस्वीरों के लिए।
  • Starlink सैटेलाइट इंटरनेट की सुविधा, जिससे फ्री और फास्ट नेटवर्क कनेक्टिविटी संभव हो।
  • बैक पैनल पर सोलर पैनल, जिससे फोन चार्जिंग के लिए सूरज की रोशनी का उपयोग किया जा सके।
  • बायोमेट्रिक सिक्योरिटी फीचर्स जैसे फिंगरप्रिंट और फेस आईडी।
  • एक कस्टम टेस्ला ओएस या एंड्रॉइड 15 आधारित सिस्टम, जो प्राइवेसी और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देगा।

टेस्ला फोन की कीमत और लॉन्च की उम्मीद :

Tesla Phone in india : टेस्ला फोन के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत को लेकर हो रही है। अनुमान है कि टेस्ला पाइ फोन की कीमत लगभग $789 (लगभग ₹70,000) के आसपास होगी, जो इसे प्रीमियम स्मार्टफोन श्रेणी में रखता है। भारत सहीत अन्य मार्केट में इस फोन की लॉन्चिंग 2025 के अंत तक मैं हो सकती है। हालांकि, टेस्ला या एलन मस्क ने अभी तक इस फोन के लॉन्च या अस्तित्व की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

टेस्ला फोन की विश्वसनीयता और अफवाहें :

Tesla Phone in india : टेस्ला के फोन को लेकर बहुत सारी बातें सोशल मीडिया हो रही हैं, लेकिन एलन मस्क ने व्यक्तिगत रूप से कहा है कि टेस्ला अभी कोई फोन बनाने का कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर रही है। अगर भविष्य में Apple या Google कंपनी के एप्स या Starlink सर्विस को ब्लॉक करती है, तो टेस्ला फोन पर विचार किया जाएगा। फिलहाल यह फोन एक चर्चा का विषय और तकनीक की दुनिया में एक संभावित क्रांति के रूप में माना जा रहा है।

टेस्ला फोन खरीदने के फायदे :

  • भरोसेमंद और अनोखी टेक्नोलॉजी प्रोवाइड करेगा टेस्ला का फोन।
  • प्रीमियम फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस के होगा।
  • Starlink सैटेलाइट इंटरनेट से ऑफलाइन इलाकों में इंटरनेट की सुविधा भी मिल सकती हैं।
  • सोलर पावर से पर्यावरण के प्रति जागरूक।
  • Tesla गाड़ियों और ऊर्जा उत्पादों के साथ इंटीग्रेशन।

निष्कर्ष (Conclusion)

Tesla Phone in india : टेस्ला का फोन स्मार्टफोन की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है।अभी यह फोन आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं हुआ है, लेकिन इसके फीचर्स और संभावनाओं को लेकर लोगों में काफी उत्साह है।अगर यह फोन बाजार में आता है, तो यह न सिर्फ टेस्ला की तकनीक को और मजबूत बनाएगा, बल्कि बाकी मोबाइल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ा देगा।

Tesla Phone in india ; FAQs :

  • Tesla phone 2025 फीचर्स
  • Tesla Pi फोन कीमत इंडिया
  • Elon Musk Tesla phone
  • टेस्ला स्मार्टफोन लॉन्च
  • Tesla Pi phone reviews हिंदी

Ahoi Astami 2025 : कब मनाई जाएगी?

Ahoi Astami 2025

Ahoi Astami 2025 : कब मनाई जाएगी? अहोई अष्टमी एक हिन्दू पर्व है, जो विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करती है।

Karwachauth Pooja Time : तारीख और समय 2025Ahoi Astami 2025 : यह व्रत दिवाली से आठ दिन पहले और करवाचौथ के चार दिन बाद कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है। और देखें...

अहोई अष्टमी का महत्व-

Ahoi Astami 2025 : अहोई अष्टमी का मुख्य उद्देश्य माताओं द्वारा, अपने संतान की रक्षा और लंबी उम्र की कामना करना है।
हिंदू परंपरा के अनुसार इस दिन माताएं बिना अन्न जल के व्रत करती हैं। और अपने बेटे-बेटियों (संतानों) की सुख-शांति, स्वास्थ्य की कामना करते आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अहोई माता की पूजा करती हैं।
माना जाता है कि माता अहोई की पूजा से अनहोनी को होनी में बदला जाता है। और परिवार में सुख शांति और शुभता आती है।

Ahoi Astami 2025 : तिथि व समय

पर्वतिथि व समय
अहोई अष्टमी13 अक्टूबर 2025, सोमवार
पूजा मुहूर्त06:07 PM से 07:19 PM
तारे दिखने का समय06:25-06:28 PM
चंद्रमा दर्शन12:09 AM (14 अक्टूबर)
अष्टमी तिथि शुरू12:24 PM (13 अक्टूबर)
अष्टमी तिथि समाप्त11:09 AM (14 अक्टूबर)

Ahoi Astami 2025 : पूजा विधि-

Ahoi Astami 2025 : अहोई अष्टमी के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। शाम के समय प्रदोष काल में दीवार या चौकी पर अहोई माता का फोटो या (आठ कोनों के साथ) और सेई (कांटेदार मूषक) की छवि बनाकर पूजा की जाती है।

पूजा के लिए रोली, चंदन, पुष्प, फल, मिठाई, गेहूं के सात दाने व कुछ दक्षिणा सामग्री रखी जाती है।
पूजा के अंत में अहोई माता की कथा सुनना जरूरी होता है। अन्यथा पूजा पूर्ण नहीं होती। कथा के बाद, तारे या चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य दिया जाता है और फिर व्रत खोला जाता है।अहोई अष्टमी व्रत कथा के दौरान माताएं अहोई अष्टमी कथा सुनती हैं।

Ahoi Astami 2025 : कथा का सारांश :

Ahoi Astami 2025 : प्रचलित कथाओं में मुख्य रूप से साहूकार की बहू की कहानी आती है। एक बहू ने गलती से जंगल में मिट्टी खोदते समय एक सेई के बच्चे की हत्या कर दी थी, जिसके दुष्परिणाम स्वरूप उसके पुत्रों की मृत्यु हो गई। पश्चाताप स्वरूप उसने अहोई माता की पूजा की और सात वर्षों तक व्रत रखा, जिससे उसके बेटे पुनः जीवित हो गए।

Ahoi Astami 2025 : परंपरा और विशेषताएं-

कई जगहों पर राधा कुंड स्नान करने की भी परंपरा है। जिससे संतान की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। महिलाएं स्याहु माला भी पहनती हैं, जो संतान की रक्षा और व्रत की पवित्रता का प्रतीक होता है।

अहोई अष्टमी पर्व माताओं के समर्पण, प्रेम और शक्ति का प्रतीक है, जिसमें परिवार के बच्चों की खुशहाली के लिए माता अहोई की आराधना की जाती है।

अहोई अष्टमी की पूजा विधि :

  • पूजा सामग्री का विस्तृत विवरण इस प्रकार है :- पूजा सामग्री (Ahoi Ashtami Puja Samagri)
  • अहोई माता का चित्र या वॉलपेपर:- जिसमें आठ कोने और अहोई माता के साथ सेई (हाथी और उसके बच्चे) की छवि हो।
  • जल का कलश (मिट्टी का या अन्य):- और उसमें गंगाजल करवा (मिट्टी का बर्तन) जिसके मुंह को मिट्टी के ढक्कन से ढका हो।
  • शृंगार का सामान:- (काजल, बिंदी, चूड़ी, आलता, सिंदूर, लाल चुनरी, साड़ी या सूट)वस्त्र (साफ़-सुथरे कपड़े)पुष्प (फूल)धूपबत्ती और दीपक (दीया) के लिए गाय का घी रोली, कलावा, अक्षत (चावल) सूखा आटा (पुजा चौक के लिए)दूध और उबले हुए चावल
  • भोग के लिए हलवा,:- पूरी, मिठाई (भोग व दक्षिणा के लिए)सात घास (सप्त घास)सुपारी, गुड़, नारियल, और फल
  • पूजा विधि:- (Ahoi Ashtami Puja Vidhi) ki संकल्प और तैयारी:

अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़-सुथरे वस्त्र पहनें। फिर घर की दीवार या पूजा स्थल को गंगाजल से स्वच्छ करें और उस पर गेरू या कुमकुम से अहोई माता का विशेष चित्र बनाएं या बाजार से चित्र लेकर लगा सकते हैं।
पूजा का प्रारंभ: पूजा स्थल पर गेहूं या अन्य सूखे अनाज को बिछाकर कलश रखें, जिसमें जल और गंगाजल हो। कलश का मुंह मिट्टी के ढक्कन से बंद कर दें। करवा की मुँह को भी बंद करना चाहिए।

अहोई माता की पूजा :

अहोई माता के चित्र के सामने दीपक जलाएं, धूप और फूल अर्पित करें। फिर रोली, अक्षत, चावल, और दूध से पूजा करें। अहोई माता के साथ सेई के चित्र की भी पूजा करें और हलवा, पूरी, मिठाई का भोग लगाएं।

कथा वर्तन :

पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की कथा का वाचन या सुनना अनिवार्य है, जिससे व्रत का फल अधिक प्राप्त होता है।

पूजा का समापन :

शाम को बादल छटने पर तारे या चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। व्रत खोलते समय अपनी सास या घर की बुजुर्ग महिला से आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है।

दक्षिणा :

पूजा के बाद भोग और दक्षिणा किसी बुजुर्ग महिला या ब्राह्मण को दी जाती है।

विशेष बातें अहोई माता की पूजा में सात बेटों और बहुओं के चित्र का भी समावेश किया जाता है।
पूजा के दौरान माता की कृपा से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना की जाती है। व्रत रखी महिला पूर्णतः निर्जला रहती हैं, और केवल पूजा के बाद तारों को देखकर व्रत तोड़ती हैं।

DISCLAIMER: उपरोक्त दी गई जानकारी आपके क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। कृपया अपने पंडित जी से सही जानकारी लेकर ही पूजा करें। आपकी पूजा में किसी भी गलती की जिम्मेदारी websamachar24.com की नही होगी धन्यवाद..!!

ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 Aus vs Pak :

ICC महिला वर्ल्ड कप 2025

ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 : और गेंदबाजों की घातक गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 107 रन से रौंदा- ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 के ऑस्ट्रेलिया महिला vs पाकिस्तान महिला मैच में Beth Mooney के बेहरीन शतक और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धारदार और सटीक गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 107 रन से पटका। जानिए मैच की कुछ खास Highlights, Scoreboard और दोनों टीमों की पूरी Playing 11…

ICC महिला वर्ल्ड कप 2025: ऑस्ट्रेलिया महिला बनाम पाकिस्तान महिला के आज खेले गए 9वाँ मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने जबरदस्त वापसी करते हुए पाकिस्तान को 107 रनों से शिकस्त दी। यह मैच कई रोमांचक मोड़ लेता गया, जहां एक समय ऑस्ट्रेलिया पर संकट के बादल छाए हुए थे , लेकिन आज के मैच की Player of The Match Beth Mooney की शानदार 109 रन की पारी ने टीम को मजबूती दिलाई और गेंदबाजों ने जीत में बहुत अहम भूमिका निभाई।

ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 पाकिस्तान महिला टीम ने Toss जीता :

ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 : पाकिस्तान ने Toss जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया, जिसने ऑस्ट्रेलिया को शुरुआती झटके देकर 76/7 कर दिया था। उसके बाद Beth Mooney (109 रन) और Alana King (51 रन) की बेहतरीन साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को 221 तक पहुँचाया। दोनों ने नौवें विकेट के लिए 106 रन जोड़े। ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को जीत के लिये 222 रनों का टारगेट दिया ।
पाकिस्तान की ओर से Nashra Sundhu और Rameen Shamim ने घातक स्पिन गेंदबाजी की और ऑस्ट्रेलिया के टॉप ऑर्डर में हलचल मचा दी।

ऑस्ट्रेलिया की खतरनाक गेंदबाज़ी :

ICC महिला वर्ल्ड कप 2025: पाकिस्तान महिला टीम 222 रनों का पीछा करने के लिए उतरी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की खतरनाक गेंदबाज़ी के आगे पाकिस्तान महिला टीम ताश के पत्तों की तरह ढैय गई,
जवाब में, ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान की पारी को महज 114 रन पर समेट दिया।

Kim Garth,Megan Schutt और Annabel Sutherland ने शुरुआती विकेट लेकर पाकिस्तान को कभी मैच में लौटने का मौका नहीं दिया। पाकिस्तान की ओर से सिद्रा अमीन (35 रन) ने कुछ देर टिकने की कोशिश की, लेकिन पूरी टीम जल्द ही ऑल आउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया ने मैच बहुत ही आसानी से अपने नाम कर लिया।

इस मुकाबले ने एक बार फिर दिखा दिया कि ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम बड़े मैचों में दबाव में भी किस तरह खुद को साबित करती है। पाकिस्तान को अपने बल्लेबाजी क्रम में मजबूत वापसी की जरूरत है, ताकि ऐसे मौके पर टीम अच्छा प्रदर्शन कर सके।

Scoreboard :

  • Australia women: 221/9 (50 ओवर) |
  • Top Scorer: Beth Mooney – 109 रन ।
  • Pakistan Women: 114 ऑल आउट (36.3 ओवर) |
  • Top Scorer: Sidra Amin – 35 रन ।
  • Result: Australia Women Team 107 रन से जीती।

Sqaud Team:

AUS Women Team :

  • Alyssa Healy (कप्तान)
  • Darcie Brown,
  • Ashleigh Gardner
  • Kim Garth
  • Grace Harris
  • Alana King
  • Phoebe Litchfield
  • Tahlia McGrath
  • Sophie Molineux
  • Beth Mooney
  • Ellyse Perry
  • Megan Schutt
  • Annabel Sutherland
  • Georgia Voll
  • Georgia Wareham

Pakistan Women Team

  • Fatima Sana (कप्तान)
  • Muneeba Ali Siddiqui (उपकप्तान)
  • Aliya Riaz,Diana Baig
  • Eyman Fatima
  • Nashra Sundhu
  • Natalia Parvaiz
  • Omaima Sohail
  • Rameen Shamim
  • Sadaf Shamas
  • Sadia Iqbal
  • Shawaal Zulfiqar
  • Sidra Amin
  • Nawaz
  • Syeda Aroob Shah

Karwachauth Pooja Time : तारीख और समय 2025

Karwachauth Pooja time

Karwachauth Pooja Time : जानिए करवाचौथ 2025 में कब, 9 तारीख या 10 तारीख को सही मुहूर्त और व्रत का सही समय।

Karwachauth Pooja Time : व्रत की तारीख और पूजा का सही समय मुहूर्त के अनुसार पूजा का समय- 05:57pm सायंकाल से लेकर 07:11pm सायंकाल तक रहेगा,

Karwachauth Pooja Time : उपवास करने का समय 06:19 am सुबह से सायं 08:13 pm तक, चतुर्थी की तिथि होगी – 10:54 PM on 09 अक्टूबर 2025 की रात्रि 10:54 मिनट से।

Karwachauth Pooja Time : साफ शब्दों में कहे तो, 09 अक्टूबर 2025 की रात्रि 10:54 से उपवास प्रारंभ करके 10 October 2025 को सायं 8:13 मिनट तक रहेगा।

Karwachauth Pooja Time : जानिए करवाचौथ : व्रत कथा

बहुत प्राचीन समय की बात है। एक ब्राह्मण थे, उनके सात पुत्र और एक पुत्री थी। ब्राह्मण की पुत्री का नाम करवा था। करवा बहुत ही प्यारी और भाइयों से प्रेम करने वाली थी।
करवा का विवाह हुआ और वो ससुराल गई। तो पहली बार करवा ने करवाचौथ का व्रत किया। करवा ने सूर्योदय से पहले कुछ नहीं खाया, और सारा दिन बिना अन्न,जल के व्रत रखा।
शाम के समय जब चांद निकलने का समय हुआ, तो करवा के सातों भाइयों ने देखा कि बहन बहुत भूखी और प्यास से व्याकुल है। सबसे छोटे भाई से यह सब देखा नहीं गया। और उसने बहन करवा के साथ छल किया। घर से काफी दूर एक पीपल के पेड़ पर दीपक जलाया और छलनी के पीछे रख दिया।

भाई ने कहा- देखो बहन चांद निकल आया।
करवा ने सोचा कि सचमुच चांद निकल आया है। उसने जल पिया और भोजन कर लिया।
लेकिन ऐसा करते ही, उसके पति की मृत्यु हो गई। करवा बहुत रोने लगी तभी देवी पार्वती ने दर्शन दिया और कहा कि, करवा तुम्हारे भाइयों के छल के कारण तुम्हारे पति अब नही रहे।
अगर तुम सच्चे मन से एक वर्ष तक करवाचौथ का व्रत करती हो, तो तुम्हारा पति फिर से जीवित हो जाएगा।
करवा ने पूरे वर्ष पूर्ण श्रद्धा भक्ति से व्रत किया। और अगले साल जब व्रत पूरा हुआ। तो दैवी पार्वती प्रसन्न हुई। और करवा के पति को जीवित कर दिया।
तब से प्रत्येक वर्ष स्त्रियां पति की लम्बी आयु और और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत करती हैं।

कथा सुनने के बाद अंत में जरूर कहें- जय करवा माता। जय गौरी माता

Karwachauth व्रत का महत्व

यह व्रत केवल परंपरा नहीं है, बल्कि निष्ठा, प्रेम और विश्वाश का प्रतीक भी है। माना जाता है, कि इस दिन स्त्री का सच्चा मन, और व्रत की शक्ति, उसके पति के जीवन में सुरक्षा और सुख लाती है।
करवाचौथ की पूजा में गौरी माता, गणेश जी, करवा माता और चंद्र देव की पूजा होती है।

Karwachauth ki Pujan Samagri :

  1. करवा ( मिट्टी या पीतल का छोटा घड़ा जिसमें जल भरा जाता है।
  2. दीपक (एक बड़ा और कुछ छोटे दीपक, मतलब [दिया] )
  3. छलनी ( चांद देखने के लिए)
  4. थाली (पूजा के लिए सजने वाली थाली)
  5. लोटा (जल चढ़ाने के लिए)
  6. कलश (जल, रोली, अक्षत से पूजा करने के लिए)
  7. रोली (तिलक लगाने के लिये)
  8. चावल ( मतलब अक्षत के लिए)
  9. सिंदूर
  10. हल्दी या कुमकुम
  11. दुर्वा घास ( दुभ की घास)
  12. फूल (लाल पीले रंग के)
  13. कपूर,
  14. अगरबत्ती
  15. धूपबत्ती
  16. मिठाई (श्रद्धा के अनुसार)
  17. सुहाग की सामग्री (जैसे चूड़ियां, बिंदी, बिछिया, मेहंदी, कंघी, आदि)

करवा माता की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री :

  1. मिट्टी या लकड़ी की करवा माता की मूर्ति ( फोटो भी चलेगा)
  2. गेहूं या चावल जिस पर मूर्ति रखी जाएगी।
  3. चुनरी या लाल कपड़ा
  4. करवा में रखा हुआ जल
  5. रोली, चावल, सिंदूर
  6. दीपक जो करवा माता के सामने जलाया जाता है।

चांद की पूजा के लिए

  1. छलनी
  2. दीपक ( छलनी पर रखकर दिखाया जाता है)
  3. जल का लोटा या करवा
  4. मिठाई पति को खिलाने के लिए।
  5. लाल कपड़ा थाली सजाने के लिए।

पति की आरती के लिए:

  1. थाली (दीपक, मिठाई अक्षत एक साथ)
  2. आरती का गीत या मंत्र (जैसे— “सौभाग्यवती हो तुम” बोलकर आरती करना)

अन्य समाग्री (अगर उपलब्ध हो)

गंगाजल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, घंटी (पूजा के समय बजाने के लिए)

सुबह की तैयारी (सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए

  1. सूर्योदय से पहले (सर्गी) :
    सास अपनी बहू को सर्गी देती है (फलों, मिठाई, सूखे मेवे, हल्का खाना)।
    यह दिन का पहला भोजन होता है।
    इसके बाद व्रत आरंभ होता है और पूरा दिन निर्जला उपवास (बिना जल पिए) रखा जाता है।
  2. नहाकर साफ कपड़े पहनें :
    सामान्यतः लाल, गुलाबी या पीले रंग के सुहाग के प्रतीक वस्त्र पहने जाते हैं।
  3. श्रृंगार करें : सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, बिछिया, और मंगलसूत्र आदि धारण करें।
    यह दिन पति के दीर्घ जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए समर्पित है।

शाम की पूजा विधि (पूजन प्रक्रिया)

  1. पूजा स्थल सजाएं: साफ जगह पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर गेहूं या चावल रखें।
    उसके ऊपर करवा माता की मूर्ति या चित्र रखें।
  2. पूजा सामग्री सजाएं: एक दीपक जलाएं। करवे में जल भरें और ढक्कन पर थोड़ा चावल रखें। एक थाली में रोली, चावल, फूल, सिंदूर, मिठाई रखें।
  3. गौरी माता, गणेश जी, और चंद्र देव की प्रार्थना करें:
    पहले गणेश जी को प्रणाम करें, फिर गौरी माता और करवा माता की पूजा करें।
  4. करवा माता की कथा सुनें या पढ़ें

आरती करें:
माता पार्वती और भगवान शिव की आरती करें–
“जय जय गौरी माता, जय जय शंकर बाबा

चाँद निकलने के बाद की विधि :

  1. जब चाँद दिखाई दे, तब छलनी में दीपक रखकर चाँद को देखें।
  2. फिर चाँद को अर्घ्य दें (जल अर्पण) करें और प्रार्थना करें —
    “हे चंद्र देव मेरे पति को दीर्घायु और सुखी जीवन दें।”
  3. अब उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें।
  4. पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत तोड़ें।
  5. इसके बाद मिठाई खाकर और आशीर्वाद लेकर व्रत पूरा करें।

DISCLAIMER: उपरोक्त दी गई जानकारी आपके क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। कृपया अपने पंडित जी से सही जानकारी लेकर ही पूजा करें। आपकी पूजा में किसी भी गलती की जिम्मेदारी websamachar24.com की नही होगी धन्यवाद..!!

Shura Khan : Bollywood की बेहतरीन अदाकारा

Shura Khan

Shura khan बॉलीवुड की एक सफल मेकअप आर्टिस्टहै,

Shura Khan अरबाज खान की दूसरी पत्नी और Glamorous World की प्रेरणादायक शख्सियत। जानिए Shura Khan की बायोग्राफी, परिवार, करियर, शादी, और उनकी सफलता के राज।

Shura khan : मां बनने की खुशी और बेबी गर्ल की खबर

2025 में शूरा खान की प्रेग्नेंसी की खबरें लगातार मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। इसी बीच अरबाज खान ने खुद इंटरव्यू में इस बात की पुष्टि की थी कि उनकी पत्नी शूरा खान मां बनने वाली हैं और दोनों अपने पहले बच्चे के स्वागत के लिए बहुत उत्साहित है,
4 अक्टूबर 2025 को शूरा खान ने मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिय. खान परिवार और बॉलीवुड सेलेब्स ने इस नई खुशी का स्वागत किया। बेबी शावर की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसमें शूरा ने अपना बेबी बंप खूबसूरत अंदाज में फ्लॉन्ट किया।

Shura khan की सोशल मीडिया एक्टिविटी और फॉलोवर्स

शूरा खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती जो कि काफी शानदार है। इंस्टाग्राम पर उनके हजारों फॉलोवर्स हैं, जहां वे फैशन, मेकअप टिप्स, पर्सनल लाइफ और डेली एक्टिविटीज से जुड़ी पोस्ट साझा करती हैं. शादी के बाद उनकी फैन फॉलोइंग में ज़बरदस्त इज़ाफा हुआ है। कई बार उनकी रोमांटिक तस्वीरें अरबाज खान के साथ वायरल होती रहती हैं। हाल ही में उनके इंस्टाग्राम अकाउंट हैक भी हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे रिकवर कर लिया और इंस्टाग्राम टीम को धन्यवाद दिया। वह अपने चाहने वालों से जुड़े रहने के लिए अक्सर स्टोरीज़, रील्स और फोटोज साझा करती हैं.

Shura Khan का बचपन और एजुकेशन

शूरा खान का जन्म London, यूनाइटेड किंगडम में एक मुस्लिम परिवार में 5 जुलाई 1982 को हुआ था , Mumbai में अपनी स्कूली शिक्षा जानकीदेवी पब्लिक स्कूल से प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई दुबई अमेरिकन साइंटिफिक स्कूल से की , शूरा खान को बचपन से ही कला और एक्टिंग का शौक था, और उनकी मां ने शूरा खान को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की भी शिक्षा दी।

शूरा खान के करियर की शुरुआत और संघर्ष

शूरा खान बॉलीवुड की एक फेमस मेकअप आर्टिस्ट हैं। शूरा खान अपना करियर मॉडलिंग मै बनाना चाहती थी, लेकिन मॉडलिंग मै उन्हें success नहीं मिली , उसके बाद उन्होंने अपना करियर एक मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर शुरू किया, शूरा खान ने रवीना टंडन और उनकी बेटी राशा के लिए उन्होंने कई सालों तक मेकअप किया, जिससे उन्हें Bollywood इंडस्ट्री में एक अच्छी पहचान मिली।

Shura Khan ने बॉलीवुड में एक्टिंग की दुनिया में भी कदम रखा, उन्होंने 2013 में बॉलीवुड डेब्यू किया, अर्जुन कपूर की फिल्म ‘औरंगजेब’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया, उसके बाद उन्होंने फिल्म ‘देसी कट्टे’ में भी काम किया ,
Shura khan ने एक्टिंग से ब्रेक लेने के बाद उन्होंने गायक के रूप में भी सफलता पायी –उन्होंने पंजाबन और सत्यमेव जयते के गाने को अपनी आवाज दी।

शूरा खान और अरबाज खान की Love Marriage

Arbaaz Khan और Shura Khan की पहली मुलाकात फिल्म ‘पटना शुक्ला’ के सेट पर हुई थी, दोनों ने करीब एक साल तक अपने रिश्ते को निजी रखा और फिर 24 दिसंबर 2023 को शादी कर ली, अरबाज और शूरा के बीच उम्र का फासला करीब 23 साल है, मगर दोनों ने सोच-समझकर शादी का फैसला लिया. शादी में सलमान खान, रवीना टंडन जैसी कई सेलिब्रिटीज शामिल हुए, और मीडिया में उनकी गुपचुप शादी की चर्चा खूब रही।

शूरा खान के परिवार ओर व्यक्तिगत जीवन

शूरा खान के पिता का नाम जाहिद खान और माता का नाम मेहजबीन जाहिद खान है, जो खुद भी ब्यूटी और वेलनेस इंडस्ट्री से जुड़ी रही हैं, शूरा खान का पालन-पोषण और बचपन मुंबई में बीता, उसके बाद के सालों में वे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भी रहीं.

शूरा खान की प्रसिद्धि और सफलता

शूरा खान की पहचान सिर्फ अरबाज खान की पत्नी होने से नहीं है, बल्कि उन्होंने बॉलीवुड में अपने टैंलेंट और कड़ी मेहनत से भी एक अलग मुकाम हासिल किया है. शादी के बाद सोशल मीडिया पर उनके फॉलोवर्स तेजी से बढ़े हैं, और अब वे ग्लैमर वर्ल्ड में एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं

शूरा खान की कहानी जहां प्रेरणा देती है वही बताती है कि दृढ़ निश्चय, हुनर और मेहनत से कोई भी अपने जीवन का लक्ष्य पा सकता है. Bollywood में उनका सफर आगे भी नई ऊंचाइयों को छूता नजर आ रहा है।

Shahrukh khan net Worth

Shahrukh Khan Net Worth

Shahrukh Khan Net Worth

Shahrukh khan net Worth : भारतीय मूल के फिल्म अभिनेता शाहरुख खान एक ऐसी शख्सियत है, जो किसी भी पहचान के मोहताज नहीं है। शाहरुख खान जी को किंग खान के नाम से भी जाना जाता है। जो आजकल सुर्खियों में हमेशा छाए ही रहते हैं। आजकल किंग खान की नेटवर्थ काफी चर्चा में है। और चर्चा में क्यूं ना हो। इस ओहदे पर पहुंचना तो कोई गुड्डे गुड़ियों का खेल तो नहीं है। तो चलिए जानते है। Shahrukh khan net Worth क्या हैं।

Shahrukh khan net Worth: 1 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार शाहरुख़ ख़ान की कुल संपत्ति 1.4 बिलियन डॉलर हो गई है,
जो भारतीय रुपये में लगभग 12,490 करोड़ रुपये होती है।

शाहरुख खान की पहले की नेटवर्थ

Shahrukh Khan Net Worth : अक्टूबर 2025 से पहले King Khan की नेटवर्थ 7790 के लगभग थी,
जो अब बढ़ कर लगभग 12490 हो गई है अब वो दुनियां के नबर वन की लिस्ट में आ गए है।

शाहरुख खान का जन्म

2 नवंबर 1965 मै हुआ न्यू मार्केट दिल्ली मै हुआ है। शाहरुख खान के माता पिता
ताज मोहम्मद खान और मां लतीफ है।

शाहरुख खान की फैमिली

शाहरुख खान की फैमिली में शाहरुख खान की वाइफ का नाम गौरी खान है, शाहरुख़ ख़ान की शादी गौरी ख़ान के साथ 25 अक्टूबर 1991 को हुई थी। शादी के समय शाहरुख़ ख़ान की उम्र लगभग 26 साल थी। गौरी ख़ान के साथ उनका परिवारतीन बच्चे – आर्यन, सुहाना और अबराम है। शाहरुख खान की शाहरुख खान जन्म 2 नवंबर 1965 मै हुआ था वो अब 60 साल के आस पास हो गए है।

शाहरुख खान की फिल्में

शुरुआती फिल्में :

  • दीवाना (1992) – डेब्यू फ़िल्म (हिट)
  • बाज़ीगर (1993)
  • डर (1993)
  • अंजाम (1994)

रोमांटिक हिट्स :

  • दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) – DDLJ (सबसे बड़ी हिट्स में से एक)
  • दिल तो पागल है (1997)
  • कुछ कुछ होता है (1998)
  • मोहब्बतें (2000)
  • कभी खुशी कभी ग़म (2001)
  • कल हो ना हो (2003)
  • वीर-ज़ारा (2004)
  • ओम शांति ओम (2007)
  • रब ने बना दी जोड़ी (2008)

अलग तरह की भूमिकाएँ :

  • स्वदेस (2004)
  • चक दे! इंडिया (2007)
  • माई नेम इज़ खान (2010)

एक्शन और नई पीढ़ी की फिल्में :

  • डॉन सीरीज़ (2006, 2011)
  • रा.वन (2011)
  • चेन्नई एक्सप्रेस (2013)
  • हैप्पी न्यू ईयर (2014)
  • रईस (2017)

हाल की बड़ी फिल्में :

  • पठान (2023)
  • जवान (2023)
  • डंकी (2023)

शाहरुख़ ख़ान की टॉप 10 सुपरहिट फिल्में :

  • जवान (2023) – ₹1,150 करोड़ वर्ल्डवाइड
  • पठान (2023) – ₹1,050 करोड़ वर्ल्डवाइड
  • चेन्नई एक्सप्रेस (2013) – ₹423 करोड़+
  • हैप्पी न्यू ईयर (2014) ₹385 करोड़+
  • दिलवाले (2015) – ₹376 करोड़+
  • रईस (2017) – ₹304 करोड़+
  • दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) – ₹120 करोड़+ (उस समय की सबसे बड़ी हिट, अब तक चल रही)
  • कभी खुशी कभी ग़म (2001) ₹135 करोड़+
  • कल हो ना हो (2003) ₹86 करोड़+
  • ओम शांति ओम (2007) ₹149 करोड़+

शाहरुख खान की एडिक्शन

शाहरुख़ ख़ान की पढ़ाई दिल्ली में हुई थी।

शुरुआती पढ़ाई: सेंट कोलंबस स्कूल, दिल्ली (St. Columba’s School, Delhi)
यहाँ उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ खेलों और नाटकों में भी हिस्सा लिया।

कॉलेज: हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (Economics में स्नातक)

आगे की पढ़ाई: जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में मास्टर की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन फिल्मों में आने के कारण अधूरी छोड़ दी।

शाहरुख खान ने 33 साल काम किया है।

शाहरुख खान 33 साल से फिल्म इंडस्ट्री में और अपने आप को हमेशा ऊपर रखा है। और वो 33 साल बाद 12490 करोड़ के मालिक बन पाए है।

शाहरुख खान जी के नेशनल फिल्म अवॉड

जी हा, 33 साल के बाद अब जाके शाहरुख खान को नेशनल फिल्म अवॉड मिला जवान मूवी के लिए
23 सितम्बर को दिल्ली मै वियान भवन मै मिला है। इसमें उन्हें रजत कमल और और एक लाख रूपए दिया गया, इसमें जो नेशनल अवॉड जीतता है, उससे 2 लाख रूपए दिए जाते है, और साथ-साथ उसी अवार्ड शो के मंच पर इस बार दो लोगों ने नेशनल फिल्म अवॉड जीता है।

विक्रांत मैसी

विक्रांत मैसी 3 अप्रैल 1987 के जमे विक्रांत मैसी को अपने अपने पहले फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉड दिया जो कि 12th फेल थीं, उन्होंने इस फिल्म काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया था।

दशहरा 2025 : असत्य पर सत्य की जीत का पर्व

Dussehra

Dussehra 2025 पर जानें विजयादशमी की तिथि, महत्व, ऐतिहासिक कथा, रावण दहन की परंपरा और धार्मिक संदेश। और ये भी जानें कि दशहरा कैसे मनाएं, क्या है सांस्कृतिक महत्व।

दशहरा या विजयादशमी, भारत का वह प्रमुख त्यौहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। यह त्यौहार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी लोगों को प्रेरित करता है

Dussehra 2025 में कब है?

दशहरा 2025 मे, इस साल 2 अक्टूबर, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन पूरे भारत में बड़े धूमधाम से रावण दहन के आयोजन किए जाते हैं और लोग हर्ष और आनंद के साथ एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। सभी लोग इसे एक त्यौहार की तरह मनाते है। बच्चे अपने माता – पिता के साथ मेलों में खूब मस्ती करते है।

Dussehra का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है?

दशहरे का संबंध दो प्रमुख पौराणिक घटनाओं से जुड़ा है।

  • भगवान श्रीराम की विजय: त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर इस संसार को एक ऐसे अधर्मी और दुराचारी असुर से बचाया और सीता माता को मुक्त कराया। इसलिए यह पर्व अच्छाई और सद्गुणों की विजय का प्रतीक है।
  • मां दुर्गा की जीत: नवरात्रि की समाप्ति पर इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का संहार किया था। अतः इसे शक्ति की जीत और भक्ति की शक्ति का संदेश देने वाला पर्व भी माना जाता है। जिसे हम सभी मिलकर हर्षौल्लास के साथ धूम – धाम से मनाते है।

Dussehra कैसे मनाया जाता है?

भारत में Dussehra के त्यौहार को लोग अनेकों तरह से मनाते है।

  • रावन दहन: बड़े-बड़े मैदानों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले बनाए जाते हैं। शाम को आतिशबाजी के बीच इनका दहन किया जाता है।जिसे बच्चे, बड़े,औरत , बुजुर्ग सभी खुशी से चिल्लाते ओर रैली बजते है । लोग Dussehare से हफ्तों पहले से ही मेले में आनन्द उठाते है।
  • रामलीला का मंचन: पूरे भारत में रामलीला का आयोजन होता है, जिसमें श्रीराम के जीवन के प्रसंगों को नाटक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। जिसे देखने के लिए लोग अपने परिवार के साथ आते है।
  • सांस्कृतिक उत्सव: बड़े-बड़े मेले लगते है यहां लोग घूमने जाते है झूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा समाज उत्सवधर्मी वातावरण में खो जाता है।

Dussehra का सामाजिक संदेश

Dussehra केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि, असत्य, चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंततः नष्ट होता है। यह हमें सत्य, नैतिकता और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है, हमें इनका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यह पर्व सामाजिक एकता और भाईचारे को भी बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करता है।

आज के समय में Dussehra का हमारे जीवन में महत्व

आज की भागदौड़ भारी जिंदगी में हम बस स्वार्थ के पीछे पागल है। Dusshera हमें यह याद दिलाता है कि, हमें अपने भीतर छिपी बुराइयों जैसे—क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अहंकार को खत्म करना चाहिए। रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रतीक है। इन बुराइयों के अंत है।

दशहरा महज एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन मूल्य सिखाने वाला अवसर है। यह हमें बताता है कि अगर हम धैर्य, साहस और सत्य को अपनाते हैं तो जीतना निश्चित है। इस विजयादशमी पर आइए संकल्प लें कि हम अपने जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता और बुराई को समाप्त करेंगे और सत्य, धर्म और प्रेम की राह पर चलेंगे।

दशहरा से जुड़े कुछ बेहतरीन सवालों के जवाब

Q1. दशहरा कब मनाया जाता है?
उत्तर: आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा मनाया जाता है।

Q2. दशहरे को विजयादशमी क्यों कहते हैं?
उत्तर: यह दिन बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।

Q3. दशहरा किसके वध की स्मृति में मनाया जाता है?
उत्तर: रावण, मेघनाद और कुंभकरण के वध की स्मृति में इसका पर्व मनाया जाता है।

Q4. दशहरा का धार्मिक महत्व क्या है?
उत्तर: सत्य, धर्म और अच्छाई की जीत का पर्व; नवरात्रि की समाप्ति पर देवी दुर्गा की पूजा समाप्त होती है।

Q5. दशहरे पर रावण का पुतला क्यों जलाया जाता है?
उत्तर: रावण दहन अहंकार व बुराई को समाप्त करने का प्रतीक है।

Q6. दशहरे के दिन कौन सा आयोजन विशेष रूप से होता है?
उत्तर: शस्त्र पूजा और रामलीला के आयोजन होते हैं, साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं।

Q7. क्या दशहरा केवल हिंदू धर्म में मनाया जाता है?
उत्तर: यह मुख्य रूप से हिंदू त्योहार है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में सभी धर्मों के लोग इसे उत्साह से मनाते हैं।

Q8. दशहरे और दीपावली में क्या संबंध है?
उत्तर: रावण वध के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने पर दीपावली मनाई जाती है।

Q9. दशहरा पर्व के दिन क्या विशेष तौर पर करना चाहिए?
उत्तर: शस्त्र पूजा करें, घर की सफाई व सजावट करें, देवी-देवताओं की पूजा करें। मान्यताओं के अनुसार, बाल-दाढ़ी कटवाने से बचें।

Q10. दशहरा का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: जीवन में सत्य, धर्म और अच्छाई की जीत निश्चित है, बुराई चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हो।

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