मां सिद्धीदात्री को सभी सिद्धियों की दात्री क्यों कहा जाता है?
माता सिद्धीदात्री, माता दुर्गा का नौवां रूप है। कहा जाता है, कि भगवान विष्णु जी ने जब सृष्टि की रचना का कार्य शुरू किया तब केवल अंधकार ही अंधकार था। तब भगवान विष्णु ने भगवान शंकर से प्रार्थना किया कि, हे भगवन् सृष्टि निर्माण में सहायता करें।
तब भगवान शंकर ने ध्यान लगाया और मां आदिशक्ति से प्रार्थना किया तब जाकर मां आदिशक्ति मां सिद्धीदात्री के रूप में प्रकट हुई। उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनो को ही अपनी आठ प्रमुख महासिद्धियों के साथ-साथ कई अन्य महाशक्तियों को प्रदान किया। इन्हीं सिद्धियों के बल पर देवताओं ने संसार रचना के संचालन का काम किया
माना जाता है कि, जब भगवान शिव जी ने मां की उपासना किया। तब मां ने आधा शरीर प्रदान किया, तब भगवान शिव अर्धनारीश्वर कहलाए। मतलब आधा शरीर देवीशक्ति का और आधा भाग भगवान शिव का हो गया। इसीलिए मां सिद्धीदात्री को सभी सिद्धियों की दात्री कहा जाता है।
नवरात्रि का नवां दिन देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। सिद्धिदात्री का अर्थ है – सिद्धि यानी अलौकिक शक्तियाँ और दात्री यानी दान करने वाली। इस प्रकार माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों को अष्ट सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। इन्हीं के पूजन से नवरात्रि साधना पूर्ण मानी जाती है।
यह दिन केवल आराधना का ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रतीक है। आइए जानते हैं नवरात्रि के नौवें दिन का महत्व, माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि और उनके पूजन से प्राप्त होने वाले लाभ।
नवरात्रि के 9वें दिन का महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित है कि भगवान शिव ने माँ सिद्धिदात्री की उपासना करके अष्ट सिद्धियाँ प्राप्त की थीं। इसी कारण वे “अर्धनारीश्वर” कहलाए। माँ सिद्धिदात्री को सिंह पर सवार और हाथों में चक्र, गदा, शंख और कमल धारण किए हुए दर्शाया जाता है।
माँ सिद्धिदात्री की कृपा से भक्तों के जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
महानवमी के दिन कई स्थानों पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन नौ कन्याओं को माँ दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजित किया जाता है।
माँ सिद्धिदात्री पूजन विधि
- घर और पूजा स्थल की शुद्धि – पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और कलश स्थापित करें।
- माँ सिद्धिदात्री का आह्वान – देवी की प्रतिमा या चित्र को लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
- भोग अर्पण – लाल फूल, फल, नारियल, और विशेषकर हलवा-पूरी-चना का भोग लगाएँ।
- मंत्र और स्तोत्र पाठ – दुर्गा सप्तशती, सिद्धिदात्री स्तोत्र और देवी मंत्र का जाप करें।
- कन्या पूजन – नौ कन्याओं के चरण धोकर उन्हें भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दें।
- आरती और भजन – दीपक जलाकर आरती करें और माँ की स्तुति गाएँ।
- दान और सेवा – गरीब और जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यकारी है।
नवरात्रि 9वें दिन से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)
- नवरात्रि के 9वें दिन किस देवी की पूजा की जाती है?
- नवरात्रि के नौवें दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
- माँ सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व क्या है?
- माँ सिद्धिदात्री भक्तों को अष्ट सिद्धियाँ प्रदान करती हैं और जीवन से कष्ट, भय तथा बाधाओं को दूर करती हैं।
- महानवमी पर कौन-सी विशेष परंपरा निभाई जाती है?
- महानवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। इसमें नौ कन्याओं को माँ दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है।
- माँ सिद्धिदात्री की पूजा में क्या भोग अर्पित किया जाता है?
- पूजा में सामान्यत: हलवा, पूरी, चना, नारियल, लाल फूल और फल अर्पित किए जाते हैं।
- माँ सिद्धिदात्री का प्रमुख मंत्र कौन-सा है?
- माँ का प्रमुख मंत्र है –
- ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
- नवरात्रि 2025 में महानवमी कब है?
- नवरात्रि 2025 की महानवमी का पर्व 1 अक्टूबर 2025 (बुधवार) को मनाया जाएगा।