
Karwachauth Pooja Time : जानिए करवाचौथ 2025 में कब, 9 तारीख या 10 तारीख को सही मुहूर्त और व्रत का सही समय।
Karwachauth Pooja Time : व्रत की तारीख और पूजा का सही समय मुहूर्त के अनुसार पूजा का समय- 05:57pm सायंकाल से लेकर 07:11pm सायंकाल तक रहेगा,
Karwachauth Pooja Time : उपवास करने का समय 06:19 am सुबह से सायं 08:13 pm तक, चतुर्थी की तिथि होगी – 10:54 PM on 09 अक्टूबर 2025 की रात्रि 10:54 मिनट से।
Karwachauth Pooja Time : साफ शब्दों में कहे तो, 09 अक्टूबर 2025 की रात्रि 10:54 से उपवास प्रारंभ करके 10 October 2025 को सायं 8:13 मिनट तक रहेगा।
Karwachauth Pooja Time : जानिए करवाचौथ : व्रत कथा
बहुत प्राचीन समय की बात है। एक ब्राह्मण थे, उनके सात पुत्र और एक पुत्री थी। ब्राह्मण की पुत्री का नाम करवा था। करवा बहुत ही प्यारी और भाइयों से प्रेम करने वाली थी।
करवा का विवाह हुआ और वो ससुराल गई। तो पहली बार करवा ने करवाचौथ का व्रत किया। करवा ने सूर्योदय से पहले कुछ नहीं खाया, और सारा दिन बिना अन्न,जल के व्रत रखा।
शाम के समय जब चांद निकलने का समय हुआ, तो करवा के सातों भाइयों ने देखा कि बहन बहुत भूखी और प्यास से व्याकुल है। सबसे छोटे भाई से यह सब देखा नहीं गया। और उसने बहन करवा के साथ छल किया। घर से काफी दूर एक पीपल के पेड़ पर दीपक जलाया और छलनी के पीछे रख दिया।
भाई ने कहा- देखो बहन चांद निकल आया।
करवा ने सोचा कि सचमुच चांद निकल आया है। उसने जल पिया और भोजन कर लिया।
लेकिन ऐसा करते ही, उसके पति की मृत्यु हो गई। करवा बहुत रोने लगी तभी देवी पार्वती ने दर्शन दिया और कहा कि, करवा तुम्हारे भाइयों के छल के कारण तुम्हारे पति अब नही रहे।
अगर तुम सच्चे मन से एक वर्ष तक करवाचौथ का व्रत करती हो, तो तुम्हारा पति फिर से जीवित हो जाएगा।
करवा ने पूरे वर्ष पूर्ण श्रद्धा भक्ति से व्रत किया। और अगले साल जब व्रत पूरा हुआ। तो दैवी पार्वती प्रसन्न हुई। और करवा के पति को जीवित कर दिया।
तब से प्रत्येक वर्ष स्त्रियां पति की लम्बी आयु और और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत करती हैं।
कथा सुनने के बाद अंत में जरूर कहें- जय करवा माता। जय गौरी माता
Karwachauth व्रत का महत्व
यह व्रत केवल परंपरा नहीं है, बल्कि निष्ठा, प्रेम और विश्वाश का प्रतीक भी है। माना जाता है, कि इस दिन स्त्री का सच्चा मन, और व्रत की शक्ति, उसके पति के जीवन में सुरक्षा और सुख लाती है।
करवाचौथ की पूजा में गौरी माता, गणेश जी, करवा माता और चंद्र देव की पूजा होती है।
Karwachauth ki Pujan Samagri :
- करवा ( मिट्टी या पीतल का छोटा घड़ा जिसमें जल भरा जाता है।
- दीपक (एक बड़ा और कुछ छोटे दीपक, मतलब [दिया] )
- छलनी ( चांद देखने के लिए)
- थाली (पूजा के लिए सजने वाली थाली)
- लोटा (जल चढ़ाने के लिए)
- कलश (जल, रोली, अक्षत से पूजा करने के लिए)
- रोली (तिलक लगाने के लिये)
- चावल ( मतलब अक्षत के लिए)
- सिंदूर
- हल्दी या कुमकुम
- दुर्वा घास ( दुभ की घास)
- फूल (लाल पीले रंग के)
- कपूर,
- अगरबत्ती
- धूपबत्ती
- मिठाई (श्रद्धा के अनुसार)
- सुहाग की सामग्री (जैसे चूड़ियां, बिंदी, बिछिया, मेहंदी, कंघी, आदि)
करवा माता की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री :
- मिट्टी या लकड़ी की करवा माता की मूर्ति ( फोटो भी चलेगा)
- गेहूं या चावल जिस पर मूर्ति रखी जाएगी।
- चुनरी या लाल कपड़ा
- करवा में रखा हुआ जल
- रोली, चावल, सिंदूर
- दीपक जो करवा माता के सामने जलाया जाता है।
चांद की पूजा के लिए
- छलनी
- दीपक ( छलनी पर रखकर दिखाया जाता है)
- जल का लोटा या करवा
- मिठाई पति को खिलाने के लिए।
- लाल कपड़ा थाली सजाने के लिए।
पति की आरती के लिए:
- थाली (दीपक, मिठाई अक्षत एक साथ)
- आरती का गीत या मंत्र (जैसे— “सौभाग्यवती हो तुम” बोलकर आरती करना)
अन्य समाग्री (अगर उपलब्ध हो)
गंगाजल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, घंटी (पूजा के समय बजाने के लिए)
सुबह की तैयारी (सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए
- सूर्योदय से पहले (सर्गी) :
सास अपनी बहू को सर्गी देती है (फलों, मिठाई, सूखे मेवे, हल्का खाना)।
यह दिन का पहला भोजन होता है।
इसके बाद व्रत आरंभ होता है और पूरा दिन निर्जला उपवास (बिना जल पिए) रखा जाता है। - नहाकर साफ कपड़े पहनें :
सामान्यतः लाल, गुलाबी या पीले रंग के सुहाग के प्रतीक वस्त्र पहने जाते हैं। - श्रृंगार करें : सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, बिछिया, और मंगलसूत्र आदि धारण करें।
यह दिन पति के दीर्घ जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए समर्पित है।
शाम की पूजा विधि (पूजन प्रक्रिया)
- पूजा स्थल सजाएं: साफ जगह पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर गेहूं या चावल रखें।
उसके ऊपर करवा माता की मूर्ति या चित्र रखें। - पूजा सामग्री सजाएं: एक दीपक जलाएं। करवे में जल भरें और ढक्कन पर थोड़ा चावल रखें। एक थाली में रोली, चावल, फूल, सिंदूर, मिठाई रखें।
- गौरी माता, गणेश जी, और चंद्र देव की प्रार्थना करें:
पहले गणेश जी को प्रणाम करें, फिर गौरी माता और करवा माता की पूजा करें। - करवा माता की कथा सुनें या पढ़ें
आरती करें:
माता पार्वती और भगवान शिव की आरती करें–
“जय जय गौरी माता, जय जय शंकर बाबा“
चाँद निकलने के बाद की विधि :
- जब चाँद दिखाई दे, तब छलनी में दीपक रखकर चाँद को देखें।
- फिर चाँद को अर्घ्य दें (जल अर्पण) करें और प्रार्थना करें —
“हे चंद्र देव मेरे पति को दीर्घायु और सुखी जीवन दें।” - अब उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें।
- पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत तोड़ें।
- इसके बाद मिठाई खाकर और आशीर्वाद लेकर व्रत पूरा करें।
DISCLAIMER: उपरोक्त दी गई जानकारी आपके क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। कृपया अपने पंडित जी से सही जानकारी लेकर ही पूजा करें। आपकी पूजा में किसी भी गलती की जिम्मेदारी websamachar24.com की नही होगी धन्यवाद..!!







