Samay Raina Case : Apology + Disabled Fund Drive

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November 27, 2025


Samay Raina Case : समय रैना केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सार्वजनिक हस्तियों की जिम्मेदारी है कि वे दिव्यांगों के लिए जागरूकता फैलाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना और तीन अन्य कॉमेडियन को सख्त संदेश देते हुए कहा कि वे सिर्फ माफी तक सीमित न रहें, बल्कि दिव्यांग (Persons with Disabilities – PwDs) achievers को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दें और उनके लिए फंड जुटाने जैसे सकारात्मक काम करें। कोर्ट ने साफ कहा कि यह उनके ऊपर “social burden” है, कोई दंडात्मक (penal) सज़ा नहीं, क्योंकि लोकप्रिय सार्वजनिक हस्तियों पर समाज के कमजोर वर्गों की आवाज़ उठाने की विशेष जिम्मेदारी होती है। ये भी पढ़ें.

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Samay Raina Case : मामला क्या है?

  • यह केस Cure SMA Foundation नामक NGO की याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप था कि समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स ने अपने शो/कॉन्टेंट में SMA (Spinal Muscular Atrophy) और अन्य दिव्यांग व्यक्तियों पर आपत्तिजनक और मज़ाक उड़ाने वाली टिप्पणियां कीं।
  • मामला मूल रूप से समय रैना के यूट्यूब शो “India’s Got Latent” और अन्य कंटेंट में दिव्यांग लोगों तथा रेयर जेनेटिक डिसऑर्डर से जूझ रहे बच्चों के बारे में किए गए Jokes से उठा, जिसके बाद यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 27 नवंबर 2025: माफी के साथ सामाजिक जिम्मेदारी (social burden) का निर्देश।

Samay Raina Case : सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स को दिव्यांगों का मज़ाक उड़ाने वाले कंटेंट के लिए माफी जताने का आदेश दिया, साथ ही उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी (social burden) का भी निर्देश दिया। SC ने कहा कि यह सिर्फ एक दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसमें इन कॉमेडियन्स को दिव्यांग व्यक्तियों की उपलब्धियों को अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाना और उनके लिए फंड जुटाना शामिल है। इस तरह, कोर्ट ने माफी के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक कार्य करने का आदेश दिया है।

“Social burden, not penal burden” का मतलब

  • CJI सुर्या कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कॉमेडियन्स पर जो जिम्मेदारी डाली जा रही है वह “social burden” है, न कि “penal burden” । यानी अभी उन पर किसी आपराधिक सज़ा की तरह का बोझ नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार और प्रायश्चित की जिम्मेदारी डाली जा रही है।
  • कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब आप समाज में बहुत लोकप्रिय और “well‑placed” हो जाते हैं, तो आपको अपना Influence समाज के कमज़ोर और वंचित वर्गों के साथ शेयर करना चाहिए और उनके लिए आवाज़ उठानी चाहिए।

पहले दिए गए आदेश और माफी की प्रक्रिया

  • इससे पहले अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स को निर्देश दिया था कि वे दिव्यांग व्यक्तियों का मज़ाक उड़ाने वाले कंटेंट के लिए बिना शर्त (Unconditional) माफी अपने यूट्यूब चैनलों, पॉडकास्ट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें।
  • बेंच ने यह भी कहा था कि जहां आपने आपत्तिजनक कंटेंट डाला, वहीं पर स्पष्ट और प्रमुख रूप से अपनी माफी व स्पष्टीकरण दिखाइए, ताकि वही ऑडियंस माफी भी देख सके; सिर्फ कोर्ट में लिखित माफी पर्याप्त नहीं मानी गई।

कोर्ट की टिप्पणी : सार्वजनिक हस्तियों पर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की अपेक्षा

Samay Raina Case : सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि सार्वजनिक हस्तियों, खासकर कॉमेडियन्स और इंटरनेट इन्फ्लुएंसर्स, पर समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की बड़ी अपेक्षा होती है।जब वे लोकप्रिय होते हैं और उनके शब्दों का व्यापक प्रभाव होता है, तो उन्हें चाहिए कि वे वंचित और कमजोर वर्गों, जैसे दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति सम्मान और समझदारी दिखाएं। कोर्ट ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव और समावेशन को भी बढ़ावा दें।

भविष्य में ऐसे कंटेंट के लिए कानूनी गाइडलाइन्स की संभावना।

Samay Raina Case

Samay Raina Case : सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में ऐसे संवेदनशील कंटेंट के लिए विशेष कानूनी गाइडलाइन्स बनाए जाने की संभावना जताई है, ताकि दिव्यांगों और अन्य कमजोर समूहों के खिलाफ अपमानजनक या आपत्तिजनक बयानों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ संतुलन बनाते हुए, ऐसे कंटेंट के लिए स्पष्ट नियम बनाए। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान बना रहेगा, जबकि संवेदनशील और कमजोर वर्गों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

आम जनता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर जिम्मेदारी का बोझ।

Samay Raina Case : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आम जनता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स दोनों पर समाज में जिम्मेदारी का बोझ है, खासकर संवेदनशील मुद्दों पर। Social Media इन्फ्लुएंसर्स को चाहिए कि वे अपने कंटेंट में संवेदनशीलता बरतें और अनुशासन का पालन करें, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आए। वहीं, आम जनता भी जागरूक रहे कि उनकी जिम्मेदारी समाज में फैलाई जा रही जानकारी एवं धारणा को सकारात्मक और जिम्मेदार बनाने की है। इस तरह, कोर्ट ने दोनों पक्षों से समाज में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बनाए रखने की अपील की है।

FAQ : Samay Raina Case – SC का आदेश

Q1. सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स को क्या निर्देश दिया?
A1. सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स को दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाने वाले कंटेंट के लिए बिना शर्त माफी मांगने और उनकी उपलब्धियों को अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाने तथा उनके लिए फंड जुटाने का निर्देश दिया है

Q2. क्या सिर्फ माफी काफी है?
A2. Samay Raina Case : नहीं, सिर्फ माफी काफी नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इन कलाकारों को सामाजिक जिम्मेदारी (social burden) भी निभानी होगी, जिसमें दिव्यांगों की उपलब्धियों को प्रमुखता देना और उनके लिए फंड जुटाना शामिल है

Q3. सार्वजनिक हस्तियों पर क्या जिम्मेदारी है?
A3. Samay Raina Case : सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि सार्वजनिक हस्तियों पर समाज के कमजोर वर्गों की आवाज उठाने और संवेदनशीलता दिखाने की विशेष जिम्मेदारी होती है। उन्हें अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करना चाहिए

Q4. भविष्य में ऐसे कंटेंट के लिए क्या नियम बनेंगे?
A4. Samay Raina Case : कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसे कंटेंट के लिए विशेष गाइडलाइन्स बनाए

Q5. आम जनता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर क्या जिम्मेदारी है?
A5. Samay Raina Case : कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आम जनता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स दोनों पर समाज में जिम्मेदारी का बोझ है। इन्फ्लुएंसर्स को अपने कंटेंट में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए, जबकि आम जनता को जागरूक रहना चाहिए कि वे सकारात्मक और जिम्मेदार जानकारी फैलाएं

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