
SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases : स्तन पकड़ना रेप की कोशिश नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी पर रोक लगाई और नई गाइडलाइन बनाने की घोषणा की। ये भी पढ़ें….Dileep Case 2017 Se 2025 Tak : 8 साल बाद रेप केस से मलयालम अभिनेता दिलीप बरी।
पूरा मामला क्या है?
SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर कड़ा रुख दिखाया है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग का स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना “रेप की कोशिश” नहीं है, और अब ऐसी असंवेदनशील टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए पूरे देश की अदालतों के लिए नई गाइडलाइन तैयार करने की बात कही है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की टिप्पणियां पीड़िताओं को डराती हैं और उन पर केस वापस लेने का दबाव बन जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और नई गाइडलाइन

- SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases : सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराध मामलों में हाईकोर्ट के असंवेदनशील आदेशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां पीड़िताओं को डराती हैं और उन पर केस वापस लेने का दबाव बनता है। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराध मामलों में जजों को संवेदनशील भाषा का उपयोग करने की सलाह दी है।
- SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases : अब नई गाइडलाइन बनाने की तैयारी चल रही है, जिसमें अदालतों को रूढ़िवादी या पीड़िता-को-दोषी ठहराने वाली भाषा का उपयोग न करने की सलाह दी जाएगी। इससे पीड़िताओं को न्यायिक प्रक्रिया में सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलेगा।
- कोर्ट ने माना कि “स्तन पकड़ना रेप की कोशिश नहीं” जैसे ऑब्जर्वेशन संवेदना की कमी दिखाते हैं और न्याय प्रक्रिया पर पीड़िता का भरोसा कमजोर कर सकते हैं।
विवादित आदेश पर क्या हुआ?
- SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक 11 साल की नाबालिग के मामले में कहा था कि स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना अपने आप में बलात्कार या बलात्कार के प्रयास की धाराओं के लिए पर्याप्त नहीं है और इसे कम गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा था।
- सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर पहले ही स्टे लगा रखा है और कहा है कि ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट को रेप के प्रयास वाली धाराओं सहित गंभीर आरोपों पर विचार करना चाहिए।
नई गाइडलाइन की तैयारी
- सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों और संगठनों से देश भर के हाईकोर्ट और निचली अदालतों के सभी ऐसे विवादित आदेश और टिप्पणियां रिकॉर्ड सहित देने को कहा है, ताकि एक समग्र गाइडलाइन बनाई जा सके।
- प्रस्तावित गाइडलाइन का मकसद यह रहेगा कि जज यौन अपराध के मामलों में रूढ़िवादी, पीड़िता-को दोषी ठहराने वाली या हल्की समझने वाली भाषा से बचें और जांच–सुनवाई में पीड़िता को डराने या शर्मिंदा करने जैसी स्थिति न बने।
समाज और मीडिया की प्रतिक्रिया

SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases : सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर समाज और मीडिया की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है। महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कदम की सराहना की है और कहा है कि यह पीड़िताओं के लिए न्याय और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। मीडिया ने भी इस मुद्दे को उठाया और अदालतों में यौन अपराध मामलों में संवेदनशीलता की जरूरत पर जोर दिया है। कई विशेषज्ञों ने कहा है कि इस तरह के फैसले से पीड़िताओं को न्याय मिलेगा और उनका भरोसा बढ़ेगा।
FAQs : SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases
Q1. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर क्यों रोक लगाई? SC Moves to Stop Victim Blaming in Rape Cases :
A1. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई क्योंकि उसमें कहा गया था कि स्तन पकड़ना या पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप की कोशिश नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां पीड़िताओं को डराती हैं और उन पर केस वापस लेने का दबाव बनता है।
Q2. सुप्रीम कोर्ट ने नई गाइडलाइन क्यों बनाने की तैयारी की?
A2. सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराध मामलों में असंवेदनशील टिप्पणियों को रोकने के लिए नई गाइडलाइन बनाने की तैयारी की है। इससे अदालतों में पीड़िताओं के साथ न्याय होगा और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
Q3. इलाहाबाद हाईकोर्ट का विवादित आदेश क्या था?
A3. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा था कि नाबालिग का स्तन पकड़ना या पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप की कोशिश नहीं है और इसे कम गंभीर अपराध माना था।
Q4. समाज और मीडिया की प्रतिक्रिया क्या रही?
A4. समाज और मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की है। महिला अधिकार संगठनों और विशेषज्ञों ने कहा है कि यह पीड़िताओं के लिए न्याय और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Q5. नई गाइडलाइन में क्या शामिल होगा?
A6. नई गाइडलाइन में अदालतों को यौन अपराध मामलों में रूढ़िवादी, पीड़िता-को-दोषी ठहराने वाली या हल्की समझने वाली भाषा का उपयोग न करने की सलाह दी जाएगी।