
Sulakshana Pandit: From Music to Stardom – जिनकी मधुर आवाज़ और बेहतरीन अभिनय से 1970-80 के दशक में बॉलीवुड में अपनी एक नई पहचान बनाई, आज भी बॉलीवुड प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं। इस लेख में उनके जीवन से लेकर उनकी यादगार फिल्मों और गानों तक, हर पहलू की दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी पेश की गई है।
सुलक्षणा पंडित का परिचय और जीवन की शुरुआत (Introduction and Early Life of Sulakshana Pandit)
Sulakshana Pandit: From Music to Stardom -सुलक्षणा पंडित (Sulakshana Pandit) का जन्म 12 जुलाई 1954 को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक संगीत से समृद्ध परिवार में हुआ था। वे पंडित जसराज की भतीजी थीं, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में एक महान कलाकार थे। बचपन से ही संगीत और कला में उनकी रुचि थी और उन्होंने अपने परिवार के इस संगीत माहौल में बड़े होकर इसे अपना करियर बनाया। ये भी पढ़ें…MS Dhoni’s IPL 2026 Comeback :Thala Returns
सुलक्षणा ने बॉलीवुड की दुनिया में प्रवेश एक प्लेबैक सिंगर के रूप में 1967 में किया था।और बाद में अपनी एक्टिंग प्रतिभा से भी लोगों का दिल जीता। उनका अभिनय और गायकी का संगम उन दिनों बॉलीवुड में एक दुर्लभ खजाना था।
Sulakshana Pandit: From Music to Stardom ‘फिल्मी सफर और प्रमुख भूमिकाएं’

सुलक्षणा पंडित (Sulakshana Pandit) ने 1975 में फिल्म ‘उलझन’ से अपना अभिनय करियर शुरू किया, जिसमें उनके सह-कलाकार प्रसिद्ध अभिनेता संजीव कुमार थे। इस फिल्म ने उन्हें एक नई पहचान दी। इसके बाद उन्होंने ‘संकठ’, ‘हेरा फेरी’, ‘खानदान’, ‘धर्म कांटा’, ‘चेहरे पे चेहरा’ और ‘दो वक्त की रोटी’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया।
Sulakshana Pandit: From Music to Stardom उनकी फिल्मों में उन्होंने हर बार अलग-अलग चरित्रों के साथ अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। साथ ही, वे उस दौर के कई बड़े सितारों जैसे राजेश खन्ना, शशि कपूर, विनोद खन्ना, और श्रीमती पत्रकारिता के लिए भी जानी जाती थीं।
गायिका के रूप में योगदान (Contribution as a Playback Singer (Sulakshana Pandit)
Sulakshana Pandit: From Music to Stardom -सुलक्षणा पंडित (Sulakshana Pandit)की आवाज़ ने भारतीय फिल्मों को कई यादगार गाने दिए। उनकी कुछ प्रसिद्ध हिट गानों में ‘तू ही सागर है तू ही किनारा’ (संकल्प), ‘पड़ेसिया तेरे देश में’ (गaram खून), ‘काटे नहीं कटते’ जैसे गीत शामिल हैं। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली, मराठी, उड़ीया, और गुजराती जैसी अन्य भाषाओं में भी गीतों को अपनी आवाज़ दी।उनकी गायकी की खासियत थी उनकी मधुर और भावुक आवाज, जिसने श्रोताओं के दिलों को गहराई से छू लिया। 1975 में उन्होंने फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर पुरस्कार भी जीता, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण था।
अंतिम समय और विरासत (Final Years and Legacy of Sulakshana Pandit)

Sulakshana Pandit: From Music to Stardom -सुलक्षणा पंडित(Sulakshana Pandit) का निधन 6 नवंबर 2025 को मुंबई में हुआ। उनकी उम्र 71 वर्ष थी। वे कार्डियक अरेस्ट के कारण दुनिया से रुखसत हुईं। उनके निधन ने बॉलीवुड और संगीत प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया।उनकी स्मृति आज भी उनके गानों, फिल्मों और दिल छू लेने वाले अभिनय के रूप में जीवित है। उन्होंने बॉलीवुड को दिये गए अपने अमूल्य योगदान के कारण एक कभी भुलाया पाने वाली छाप छोड़ी है।
सुलक्षणा पंडित के कुछ लोकप्रिय गाने (Some Popular Songs of Sulakshana Pandit)
- सुलक्षणा पंडित के कुछ लोकप्रिय गाने
- “तू ही सागर है तू ही किनारा” – फिल्म संकल्प (1975)
- “पड़ेसिया तेरे देश में” – फिल्म गरम खून (1979)”
- बाँधी रे कहे प्रीत” – फिल्म संकोच (1976)
- “सोमवार को हम मिले” – फिल्म अपनापन (1977)
- “जब आती होगी याद मेरी” – फिल्म फांसी (1978)
निष्कर्ष (Conclusion)
Sulakshana Pandit: From Music to Stardom -सुलक्षणा पंडित (Sulakshana Pandit) का जीवन और करियर उनकी बहुमुखी प्रतिभा का जादू है जिसने अभिनय और संगीत दोनों क्षेत्रों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक व्यक्ति जो समर्पण और प्रेम से भरा था, उन्होंने बॉलीवुड के सुनहरे दौर को अपनी विशेष छाप देकर हमेशा के लिए यादगार बना दिया।उनकी मधुर आवाज़ और सजीव अभिनय आज भी दिलों को छूते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।