Toilet Commode New Born Baby Case: नवजात बच्ची के साथ मां की क्रूरता

Toilet Commode New Born Baby Case

Toilet Commode New Born Baby Case: M.P. के छिंदवाड़ा में नवजात बच्ची का शव कमोड में फंसा मिला। अनचाही बेटी को जन्म देकर फ्लश करने का संदेह, पूरी खबर पढ़ें…

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में परासिया सिविल अस्पताल के टॉयलेट में नवजात बच्ची का शव कमोड में फंसा मिलना एक दिल दहला देने वाली घटना है। यह हादसा 15 दिसंबर 2025 को सामने आया, जब सफाईकर्मी ने कमोड में पानी का बहाव रुकने पर शव की खोजबीन की। पुलिस को शक है, कि किसी महिला ने बच्चे को जन्म देकर उसे जिंदा ही फ्लश करने की कोशिश की।

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घटना की पूरी कहानी : Toilet Commode New Born Baby Case

Toilet Commode New Born Baby Case

Toilet Commode New Born Baby Case: परासिया सिविल अस्पताल में सोमवार सुबह सफाईकर्मी टॉयलेट की सफाई कर रहा था। अचानक कमोड से पानी का प्रवाह रुक गया। गौर करने पर कर्मचारी को कमोड के अंदर एक नवजात बच्ची का शव फंसा नजर आया। सूचना मिलते ही पुलिस, नगर पालिका की टीम और अस्पताल स्टाफ मौके पर पहुंचे। लगभग 7-8 घंटे की मशक्कत के बाद कमोड तोड़कर शव बाहर निकाला गया।

शव की हालत ऐसी थी कि बच्ची बुरी तरह फंस चुकी थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन प्रारंभिक जांच में संदेह जताया गया कि बच्ची को जन्म के तुरंत बाद कमोड में डाल दिया गया। अस्पताल के ओपीडी रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने हाल ही में गर्भवती महिलाओं या प्रसव के बाद दिखी संदिग्ध महिलाओं पर नजर रखी है।

संदिग्ध मां की तलाश

Toilet Commode New Born Baby Case: पुलिस का मानना है, कि यह अनचाही संतान का मामला हो सकता है। बच्चा एक लड़की होने के कारण परिवार ने उसे ठिकाने लगाने की साजिश रची। छिंदवाड़ा एसपी ने बताया कि दोषी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन पर भी लापरवाही का आरोप लग रहा है, क्योंकि सीसीटीवी में कई महिलाएं दिखीं जिनकी पहचान नहीं हो पाई।

यह पहली घटना नहीं है। गुजरात और छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं, जहां महिलाएं अस्पताल टॉयलेट में बच्चे को जन्म देकर छोड़ देती हैं। लेकिन छिंदवाड़ा कांड की क्रूरता ने पूरे देश को झकझोर दिया।

सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण

Toilet Commode New Born Baby Case: भारत में लड़की बच्चे को बोझ मानने की कुप्रथा आज भी जिंदा है। कन्या भ्रूण हत्या से लेकर नवजात हत्या तक, लिंग भेदभाव गहरा जड़ें जमाए है। कई महिलाएं अविवाहित मां बनने के डर से या पारिवारिक दबाव में ऐसे कदम उठाती हैं। छिंदवाड़ा मामले में भी मां ने बच्चे को कमोड में फ्लश करने की कोशिश की, जो उसकी मानसिक पीड़ा दर्शाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव के बाद हार्मोनल असंतुलन और डिप्रेशन भी कारण हो सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी महिलाओं को अकेले प्रसव करने पर मजबूर करती है। सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के बावजूद ऐसे मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे।

कानूनी प्रावधान और सजा

Toilet Commode New Born Baby Case: इस तरह की घटनाओं के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और POCSO एक्ट लागू हो सकता है। नवजात हत्या पर आजीवन कारावास या फांसी तक की सजा हो सकती है। मध्य प्रदेश पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

अस्पतालों में सुरक्षा उपाय

Toilet Commode New Born Baby Case: ऐसे हादसों को रोकने के लिए अस्पतालों को अलर्ट रहना चाहिए। सीसीटीवी हर टॉयलेट के बाहर लगाएं, सफाईकर्मियों को प्रशिक्षित करें और गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करें। केंद्र सरकार ने भी दिशानिर्देश जारी किए हैं कि प्रसव कक्षों की निगरानी हो। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने छिंदवाड़ा अस्पताल को नोटिस जारी किया। भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं।

समाज की जिम्मेदारी

यह घटना समाज को आईना दिखाती है। लड़कियों को बोझ न मानें, बल्कि सशक्त बनाएं। माता-पिता को बेटियों के लिए प्रेरणा दें। स्कूलों में लिंग समानता की शिक्षा दें। महिलाओं के लिए हेल्पलाइन 1098 को मजबूत करें।

रोकथाम के कुछ उपाय

  • जागरूकता अभियान: गांव-गांव में शिविर लगाएं।
  • महिला हेल्पलाइन: 24×7 उपलब्ध रखें।
  • अस्पताल सुधार: टॉयलेट में सेंसर लगाएं।
  • कानूनी सख्ती: तेज ट्रायल सुनिश्चित करें।